आतंकी संगठन ओसामा बिन लादेन के मारे जाने काबदला लेने की फिराक में हैं। अल कायदा ने अमेरिकीअधिकारियों को उनके घर में घुसकर बम से उड़ाने कीधमकी दी है। आतंकी संगठन ने ईराक से जुड़े उनअमेरिकी अधिकारियों की सूची भी तैयार की है जो उनकेनिशाने पर हैं। अल कायदा ने अपने लड़ाकों से कहा है किवो अमेरिकी अधिकारियों को उनके घर में पार्सल बमभेजकर उड़ा दें।
अल कायदा से जुड़ी एक वेबसाइट ने जैसे ही इन अधिकारियों के नाम और फोटो जारी किए अमेरिकी गृह विभागमें हड़कंप मच गया। होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट ने आनन-फानन में इंटरनेट अलर्ट जारी कर दिया है।दुनियाभर के आतंकवादियों के लिए मंच के तौर पर काम करने वाले वेबसाइट अंसार अल मुजाहिदीन परअमेरिकी अधिकारियों की सूची जारी की गई है। यह वेबसाइट जिहादी प्रोपेगेंडा का प्रचार करने वाले चोटी के 10 वेबसाइटों में से एक है। इस सूची में रक्षा मंत्रालय, संसद सदस्यों और कुछ निजी लोगों के भी नाम शामिल हैं।
अमेरिका ने अल कायदा के नए नेता पर जवाबी पलटवार में कहा है कि वह भी ओसामा जैसे हश्र के लिए तैयाररहे। कायदा ने अयमान अल जवाहरी को अपना नया नेता बनाया है। इसके बाद जवाहरी की ओर से कहा गया थाकि अल कायदा अमेरिका के खिलाफ 'जिहाद' जारी रखेगा। पर अमेरिका जवाहरी को एकदम हल्के में ले रहा है।उसका मानना है कि उसके पास न तो लड़ाई लड़ने का अनुभव है और न ही संगठन का नेतृत्व करने की क्षमता।ऐसे में वह अल कायदा के लिए कुछ नहीं कर पाएगा।
अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारी माइक मुलेन ने कहा कि अमेरिका जवाहरी का भी वही हश्र करेगा जो लादेनका हुआ। लादेन को 2 मई को अमेरिकी कमांडो कार्रवाई में मार गिराया गया था। अल कायदा ने 15 जून को ऐलानकिया कि जवाहरी ओसामा बिन लादेन की जगह लेगा। जवाहरी पर 110 करोड़ रुपए का इनाम है। नेता बनने केतुरंत बाद उसने एलान किया कि अमेरिका और इजराइल के खिलाफ उनकी जंग जारी रहेगी। अल जवाहरी लंबेसमय से अल कायदा में नंबर दो था। जवाहरी मिस्र का रहने वाला है और आतंकवादी बनने के पहले वह डॉक्टरथा। वह लंबे समय से वह अल कायदा के लिए वीडियो और ऑडियो टेप जारी कर रहा है, जिसमें उसने पश्चिमी देशोंको निशाना बनाने की बात की है।
अल कायदा ने एक वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि हम खुदा से दुआ करते हैं कि अल जवाहरी के नेतृत्व मेंअल कायदा को सफलता मिलें और धरती से तानाशाहों औऱ काफिरों का शासन खत्म हो। अमेरिका को लंबे समयसे जवाहरी की तलाश है। अमेरिका जवाहरी को 2001 में अमेरिका पर हुए हमले के भी पहले से खोज रहा है।में न्यू यार्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन पर हुए हमले में 3000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। अमेरिका नेउसके लिए ओसामा बिन लादेन को जिम्मेदार बताया था। तंजानिया और कीनिया में 1998 में अमेरिकी दूतावासोंपर हुए हमले में मुख्य भूमिका निभाने के आरोप में 1999 में उसका अनुपस्थिति में ट्रायल हुआ। इसमें वह दोषीपाया गया था। इन हमलों में 224 लोग मारे गए थे।
लीबिया में अल कायदा के दो नेता - अतिय अबद अल रहमान और अबु याह्या अल लिबी भी अल कायदा चीफबनने की दौड़ में शामिल थे, लेकिन संगठन के अधिकांश नेताओं ने जवाहरी का समर्थन किया। हालांकि जवाहरीसंगठन में ज्यादा लोकप्रिय नहीं है। उसकी समझौता न करने और संगठन को अपने हिसाब से चलाने की छवि केकारण कैडर में बड़ी संख्या में लोग उससे नाराज भी हैं।
जवाहरी 15 साल की उम्र में पहली बार गैर कानूनी घोषित किए गए संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य बनने केबाद गिरफ्तार किया गया। 1973 में उसने मिस्र में मुस्लिमों द्वारा छेड़े गए जेहाद में हिस्सा लिया। चरमपंथियों नेमिस्र में एक परेड के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या कर दी और तब संदेह के आधार परजवाहरी गिरफ्तार किया गया। हालांकि उसे हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया गया, लेकिन अवैध हथियार रखने केआरोप में उसे तीन साल की सजा हुई। रिहा होने के बाद 1985 में वह पेशावर के रास्ते अफगानिस्तान चला गयाऔर तभी से आतंकी गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।
2001
अल कायदा से जुड़ी एक वेबसाइट ने जैसे ही इन अधिकारियों के नाम और फोटो जारी किए अमेरिकी गृह विभागमें हड़कंप मच गया। होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट ने आनन-फानन में इंटरनेट अलर्ट जारी कर दिया है।दुनियाभर के आतंकवादियों के लिए मंच के तौर पर काम करने वाले वेबसाइट अंसार अल मुजाहिदीन परअमेरिकी अधिकारियों की सूची जारी की गई है। यह वेबसाइट जिहादी प्रोपेगेंडा का प्रचार करने वाले चोटी के 10 वेबसाइटों में से एक है। इस सूची में रक्षा मंत्रालय, संसद सदस्यों और कुछ निजी लोगों के भी नाम शामिल हैं।
अमेरिका ने अल कायदा के नए नेता पर जवाबी पलटवार में कहा है कि वह भी ओसामा जैसे हश्र के लिए तैयाररहे। कायदा ने अयमान अल जवाहरी को अपना नया नेता बनाया है। इसके बाद जवाहरी की ओर से कहा गया थाकि अल कायदा अमेरिका के खिलाफ 'जिहाद' जारी रखेगा। पर अमेरिका जवाहरी को एकदम हल्के में ले रहा है।उसका मानना है कि उसके पास न तो लड़ाई लड़ने का अनुभव है और न ही संगठन का नेतृत्व करने की क्षमता।ऐसे में वह अल कायदा के लिए कुछ नहीं कर पाएगा।
अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारी माइक मुलेन ने कहा कि अमेरिका जवाहरी का भी वही हश्र करेगा जो लादेनका हुआ। लादेन को 2 मई को अमेरिकी कमांडो कार्रवाई में मार गिराया गया था। अल कायदा ने 15 जून को ऐलानकिया कि जवाहरी ओसामा बिन लादेन की जगह लेगा। जवाहरी पर 110 करोड़ रुपए का इनाम है। नेता बनने केतुरंत बाद उसने एलान किया कि अमेरिका और इजराइल के खिलाफ उनकी जंग जारी रहेगी। अल जवाहरी लंबेसमय से अल कायदा में नंबर दो था। जवाहरी मिस्र का रहने वाला है और आतंकवादी बनने के पहले वह डॉक्टरथा। वह लंबे समय से वह अल कायदा के लिए वीडियो और ऑडियो टेप जारी कर रहा है, जिसमें उसने पश्चिमी देशोंको निशाना बनाने की बात की है।
अल कायदा ने एक वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि हम खुदा से दुआ करते हैं कि अल जवाहरी के नेतृत्व मेंअल कायदा को सफलता मिलें और धरती से तानाशाहों औऱ काफिरों का शासन खत्म हो। अमेरिका को लंबे समयसे जवाहरी की तलाश है। अमेरिका जवाहरी को 2001 में अमेरिका पर हुए हमले के भी पहले से खोज रहा है।में न्यू यार्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन पर हुए हमले में 3000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। अमेरिका नेउसके लिए ओसामा बिन लादेन को जिम्मेदार बताया था। तंजानिया और कीनिया में 1998 में अमेरिकी दूतावासोंपर हुए हमले में मुख्य भूमिका निभाने के आरोप में 1999 में उसका अनुपस्थिति में ट्रायल हुआ। इसमें वह दोषीपाया गया था। इन हमलों में 224 लोग मारे गए थे।
लीबिया में अल कायदा के दो नेता - अतिय अबद अल रहमान और अबु याह्या अल लिबी भी अल कायदा चीफबनने की दौड़ में शामिल थे, लेकिन संगठन के अधिकांश नेताओं ने जवाहरी का समर्थन किया। हालांकि जवाहरीसंगठन में ज्यादा लोकप्रिय नहीं है। उसकी समझौता न करने और संगठन को अपने हिसाब से चलाने की छवि केकारण कैडर में बड़ी संख्या में लोग उससे नाराज भी हैं।
जवाहरी 15 साल की उम्र में पहली बार गैर कानूनी घोषित किए गए संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य बनने केबाद गिरफ्तार किया गया। 1973 में उसने मिस्र में मुस्लिमों द्वारा छेड़े गए जेहाद में हिस्सा लिया। चरमपंथियों नेमिस्र में एक परेड के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या कर दी और तब संदेह के आधार परजवाहरी गिरफ्तार किया गया। हालांकि उसे हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया गया, लेकिन अवैध हथियार रखने केआरोप में उसे तीन साल की सजा हुई। रिहा होने के बाद 1985 में वह पेशावर के रास्ते अफगानिस्तान चला गयाऔर तभी से आतंकी गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।
2001

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