लोकपाल बिल पर सरकार और टीम अन्ना हजारे के बीचआरोप-प्रत्यारोपों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा। अन्नाहजारे ने सरकार पर लोगों के साथ छल करने का आरोपलगाते हुए चेतावनी दी कि वे 16 अगस्त से फिर से अनशनशुरू कर देंगे। इसके जवाब में सरकार ने कहा है कि अनशनके जरिए बिल नहीं बनाया जा सकता। अनशन की धमकी सेनहीं डरने का संकेत देते हुए सरकार ने कहा कि धमकी औरसंवाद दोनों साथ नहीं चल सकते। सरकार ने आरोप लगायाकि सिविल सोसायटी लोकपाल बिल पर गंभीर नहीं है।संसदीय लोकतंत्र में निर्वाचित संस्थाओं की अवहेलना करनेका मतलब अराजकता का माहौल बनाना है।
सरकार के तेवरों से साफ है कि इस दफा वह अन्ना को अनशन पर नहीं बैठने देगी। 30 जून तक हर हाल मेंलोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने का एलान करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि दुनिया केकिसी भी देश में बहस और वार्तालाप से कानून बनते हैं, न कि अनशन से।
लोकपाल बिल पर संयुक्त मसौदा समिति सरकार के गले की फांस बन गई है। इससे निपटने के लिए प्रधानमंत्री नेगुरुवार को अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ बात करने के अलावा कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह से भीचर्चा की। महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार के रुख से मीडिया को अवगत कराने के लिए गठित मंत्री समूह ने भी बैठककी।
बाद में संयुक्त मसौदा समिति मे शामिल मंत्रियों पी. चिदंबरम, कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद ने एक संवाददातासम्मेलन में कहा कि 30 जून तक एक सख्त और कारगर लोकपाल बिल का मसौदा तैयार कर लिया जाएगा। हमसिविल सोसायटी से बातचीत जारी रखेंगे। अगर अगली बैठकों 20 और 21 जून तक कोई सहमति नहीं हुई तोकैबिनेट को सहमत और असहमत दोनों मुद्दों पर अलग-अलग नोट भेजे जा सकते हैं। सिब्बल ने कहा किअसहमति का मतलब संवाद खत्म करके अनशन करना नहीं है। सिब्बल ने कहा कि कई बार हम मंत्रियों के बीचभी कई मुद्दों पर सहमति नहीं होती है। लेकिन इसकी वजह से कामकाज नहीं रोका जा सकता। सरकार की तरफसे यह भी स्पष्ट किया गया कि कैबिनेट को बिल के दो मसौदे नहीं भेजे जाएंगे, बल्कि दो अलग रायें भेजी जासकती हैं। सिविल सोसायटी के लोकपाल पर टिप्पणी करते हुए सिब्बल ने कहा कि हम सरकार के समानांतरकोई नया ढांचा खड़ा नहीं कर सकते। राजनीतिक प्रक्रिया का सम्मान करना होगा। न्यायपालिका लोकपाल केआधीन होने से संविधान के मूल ढांचे में ही गड़बड़ी पैदा हो जाएगी।
लोकपाल पर सरकार और कांग्रेस ने जनता के बीच जाने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस इस महीने एक देशव्यापीअभियान चलाकर लोगों को बता रहा है कि अन्ना और बाबा रामदेव के पीछे संघ परिवार है। इनकी असली मंशालोकपाल या भ्रष्टाचार से लड़ना नहीं है , बल्कि सरकार और देश को अस्थिर करना है। सात साल के यूपीए केशासन काल में कांग्रेस और सरकार पहली बार राजनीतिक रूप लाचार दिख रही हैं। इस हताशा में कांग्रेस औरसरकार एक दूसरे पर गलतियों की जिम्मेदारियां भी मढ़ने लगीं हैं।
सरकार के तेवरों से साफ है कि इस दफा वह अन्ना को अनशन पर नहीं बैठने देगी। 30 जून तक हर हाल मेंलोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने का एलान करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि दुनिया केकिसी भी देश में बहस और वार्तालाप से कानून बनते हैं, न कि अनशन से।
लोकपाल बिल पर संयुक्त मसौदा समिति सरकार के गले की फांस बन गई है। इससे निपटने के लिए प्रधानमंत्री नेगुरुवार को अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ बात करने के अलावा कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह से भीचर्चा की। महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार के रुख से मीडिया को अवगत कराने के लिए गठित मंत्री समूह ने भी बैठककी।
बाद में संयुक्त मसौदा समिति मे शामिल मंत्रियों पी. चिदंबरम, कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद ने एक संवाददातासम्मेलन में कहा कि 30 जून तक एक सख्त और कारगर लोकपाल बिल का मसौदा तैयार कर लिया जाएगा। हमसिविल सोसायटी से बातचीत जारी रखेंगे। अगर अगली बैठकों 20 और 21 जून तक कोई सहमति नहीं हुई तोकैबिनेट को सहमत और असहमत दोनों मुद्दों पर अलग-अलग नोट भेजे जा सकते हैं। सिब्बल ने कहा किअसहमति का मतलब संवाद खत्म करके अनशन करना नहीं है। सिब्बल ने कहा कि कई बार हम मंत्रियों के बीचभी कई मुद्दों पर सहमति नहीं होती है। लेकिन इसकी वजह से कामकाज नहीं रोका जा सकता। सरकार की तरफसे यह भी स्पष्ट किया गया कि कैबिनेट को बिल के दो मसौदे नहीं भेजे जाएंगे, बल्कि दो अलग रायें भेजी जासकती हैं। सिविल सोसायटी के लोकपाल पर टिप्पणी करते हुए सिब्बल ने कहा कि हम सरकार के समानांतरकोई नया ढांचा खड़ा नहीं कर सकते। राजनीतिक प्रक्रिया का सम्मान करना होगा। न्यायपालिका लोकपाल केआधीन होने से संविधान के मूल ढांचे में ही गड़बड़ी पैदा हो जाएगी।
लोकपाल पर सरकार और कांग्रेस ने जनता के बीच जाने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस इस महीने एक देशव्यापीअभियान चलाकर लोगों को बता रहा है कि अन्ना और बाबा रामदेव के पीछे संघ परिवार है। इनकी असली मंशालोकपाल या भ्रष्टाचार से लड़ना नहीं है , बल्कि सरकार और देश को अस्थिर करना है। सात साल के यूपीए केशासन काल में कांग्रेस और सरकार पहली बार राजनीतिक रूप लाचार दिख रही हैं। इस हताशा में कांग्रेस औरसरकार एक दूसरे पर गलतियों की जिम्मेदारियां भी मढ़ने लगीं हैं।

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