सरकार ने डाकघर की बचत योजनाओं से टैक्स फ्री ब्याज की सीमा तय कर दी है। अब तक सरकार की ओर से ऐसी कोई पाबंदी नहीं थी। आयकर विभाग के मुताबिक एक कारोबारी साल में सिंगल अकाउंट पर 3500 रुपये से ज्यादा के ब्याज पर टैक्स देना होगा।
3500 रुपये से ज्यादा का ब्याज कुल आमदनी में जुड़ेगा। फिर 10, 20, या 30 फीसदी के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा। वहीं यदि एक से ज्यादा व्यक्तियों के नाम पर अकाउंट है तो 7000 रुपये तक के ब्याज पर पर टैक्स नहीं लगेगा।
ज्वाइंट अकाउंट होने पर 7000 रुपये के ऊपर का ब्याज कुल आमदनी में जुड़ेगा, फिर उसपर टैक्स देना होगा। सरकार की ये नयी व्यवस्था 3 जून से लागू हो जाएगी। कारोबारी साल 2011-12 के दौरान तय सीमा से ज्यादा का ब्याज कुल आमदनी में जुड़ेगा। डाक घर की बचत योजनाओं पर 3.5 फीसदी की सालाना दर के हिसाब से ब्याज मिलता है।

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