भारतीय हॉकी टीम के लिए विदेशी विशेषज्ञ की तलाश की जाएगी, इसके लिए एक पांच सदस्यीय समिति को जिम्मेदारी दी है. हॉकी इंडिया (एचआई) ने मंगलवार को इस सम्बंध में फैसला लिया. मलेशिया के शहर इपोह में इस महीने आयोजित सुल्तान अजलान शाह हॉकी टूर्नामेंट में भारतीय टीम के निराशाजनक प्रदर्शन की समीक्षा के बाद मंगलवार को यह निर्णय लिया गया.
हॉकी इंडिया ने उन जरूरतों पर भी विचार किया, जिनके आधार पर चैम्पियंस ट्रॉफी और ओलम्पिक क्वालीफायर जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों के लिए टीम को अच्छी तरह तैयार किया जा सकता है. पांच सदस्यीय समिति का अध्यक्ष पूर्व अंतर्राष्ट्रीयखिलाड़ी परगट सिंह को बनाया गया है. इसके सदस्यों में एस.एस. ग्रेवाल, बलबीर सिंह, जगबीर सिंह और ए. बी. सुबैया को शामिल किया गया है.
एचआई के महासचिव नरेंद्र बत्रा ने कहा, "समिति 15 दिनों में विशेषज्ञों के नामों के सुझाव के साथ 15 दिनों की भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी." विशेषज्ञ की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर बत्रा ने कहा, "इस बारे में निर्णय लिया जाना अभी बाकी है." बत्रा, परगट सिंह के अध्यक्षता वाली कोचिंग और विकास समिति, कोच हरेंद्र सिंह और उनके सहयोगी स्टाफ, चयनकर्ताओं, पूर्व खिलाड़ियों और एचआई अधिकारियों ने इस बैठक में हिस्सा लिया.
टीम के प्रबंधक के तौर पर मलेशिया गए चयनकर्ता बलबीर सिंह ने टीम के खराब प्रदर्शन के पीछे खराब फिटनेस को कारण बताया. सात देशों के टूर्नामेंट में भारतीय टीम छठे स्थान पर रही थी. 2009 और 2010 में भारत ने यह खिताब जीता था. बलबीर ने कहा, "हमारे खिलाड़ियों का फिटनेस स्तर दूसरी टीमों जैसा नहीं है. इस स्तर पर हम काफी पीछे हैं." यह पूछे जाने पर कि ट्रायल के दौरान आखिरकार टीम प्रबंधन ने फिटनेस पर क्यों नहीं ध्यान दिया, बलबीर ने कहा, "ट्रॉयल के दौरान फिटनेस पर पूरी तरह ध्यान देना सम्भव नहीं. हमारी टीम ने राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलोंे में अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन चार महीने के आराम ने उसके फिटनेस स्तर को निगल लिया."
"चार महीने का आराम खिलाड़ियों के लिए बिल्कुल ठीक नहीं था. मैं यह नहीं बता सकता कि इस दौरान उनका फिटनेस स्तर इतना खराब कैसे हो गया. इस सम्बंध में टीम के फिजियो से पूछा जाए तो बेहतर होगा." परगट सिंह ने कहा कि हॉकी के कर्ताधर्ताओं के टीम के प्रदर्शन पर ध्यान देना होगा. बकौल परगट, "टीम अच्छा नहीं खेल रही है, इसका मतलब यह है कि सबकुछ अच्छा नहीं है. हमें टीम की कमियों को दूर करने के लिए मिलकर काम करना होगा. इसमें सरकार, एचआई, कोच, खिलाड़ियों और टीम स्टाफ का सम्पूर्ण सहयोग होना चाहिए. इस खेल के विकास के लिए समुचित विकास कार्यक्रम की जरूरत है."

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