लोकपाल बिल के मसौदे पर रजामंदी की कोशिशें विफल होने के बाद अन्ना हजारे ने बुधवार को केंद्र सरकार पर फिर हमला बोला। अन्ना ने भ्रष्टाचार पर नेताओं और अफसरों के बीच साठगांठ को पाकिस्तान से भी बड़ा खतरा बताया। अन्ना ने 16 अगस्त से फिर अनशन शुरू करने के फैसले को दोहराया। साथ ही नागरिकों से आह्वान किया कि वे फिर इसके प्रति एकजुटता दिखाएं।
अन्ना ने यहां एक प्रेस कान्फ्रेंस में सरकार को चेताया कि बार-बार कोशिशों के बावजूद सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके आंदोलन को बाबा रामदेव के संघर्ष की तरह रोकने में कामयाब नहीं होगी। उन्होंने कहा, ‘भले ही वह लाठीचार्ज करे, गोलियां चलाए। लेकिन मैं आखिरी दम तक संघर्ष करूंगा।’
अन्ना ने सरकार के इस आरोप का खंडन किया कि सिविल सोसाइटी समानांतर सरकार चाहती है। उन्होंने सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट पर सरकार की कोई नहीं चलती। क्या उसे समानांतर सरकार कहा जाना चाहिए? या सूचना आयुक्त अथवा चुनाव आयोग को समानांतर सरकार कहा जाए? अन्ना ने साफ किया कि हम इन्हीं संस्थाओं की तरह एक स्वायत्त लोकपाल चाहते हैं। हजारे ने ये विचार कपिल सिब्बल के उस आरोप के संदर्भ में जताए जिसमें केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि सिविल सोसाइटी केंद्र सरकार पर दबाव बनाकर समानांतर सरकार खड़ी करना चाहती है।
सरकारी सूत्रों ने बताया है कि सिविल सोसाइटी तथा सरकार के अलग-अलग प्रस्तावित लोकपाल बिल मसौदों पर विचार के लिए 3 जुलाई को सर्वदलीय बैठक होगी। इसमें सरकार भ्रष्टाचार विरोधी इस बिल के दोनों मसौदों को राजनीतिक दलों के सामने पेश करेगी। टीम अन्ना के मसौदे के कई हिस्से सरकारी प्रस्ताव में नहीं हैं। लगभग दो महीनों में हुईं नौ बैठकों के बाद सिविल सोसाइटी व सरकार में बिल के एक साझा मसौदे पर सहमति बनाने की कोशिशें मंगलवार को विफल हो गई थीं।

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