अलग मिथिलांचल की मांग जायज:-ताराकांत - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 25 जून 2011

अलग मिथिलांचल की मांग जायज:-ताराकांत

अलग मिथिलांचल राज्य बनाने का समर्थन करते हुए विधानपरिषद के सभापति ताराकांत झा ने शुक्रवार को कहा कि सभापति का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह इसके लिए अभियान चलायेंगे। विधानमंडल भवन के सभापति कक्ष में झा ने कहा कि अलग मिथिलांचल की मांग जायज है। वह सभापति का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अलग मिथिलांचल के लिए अभियान चलायेंगे।

उन्होंने कहा कि राज्यों के इतिहास में अलग-अलग पड़ाव आते रहे हैं। बिहार के साथ भी कुछ ऐसा ही है। 1912 में बिहार से बंगाल अलग हुआ, 1936 में उड़ीसा और 2000 में प्रदेश से अलग झारखंड का निर्माण किया गया। झा ने कहा कि 24 फरवरी 1956 को तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह ने विधानसभा में प्रस्ताव लाकर बिहार और पश्चिम बंगाल के एकीकरण की पहल की थी जिसके पक्ष में 157 और विरोध में 25 वोट पड़े थे।

बिहार विधानपरिषद के शताब्दी वर्ष के व्याख्यानमाला की अगली कड़ी में इस्लामी विषयों के जानकार अख्तएल बाशे, संविधान के विशेषज्ञ सुभाष काश्यप, वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर और भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का भाषण कराने का निर्णय किया गया है। पहले व्याख्यान में इस वर्ष तीन मई को पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने संबोधित किया था। झा ने कहा कि 23 जुलाई को जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में इस्लामी अध्ययन के अध्यक्ष प्रोफेसर बाशे का व्याख्यान होगा। शताब्दी वर्ष का समापन समारोह अप्रैल 2012 में होगा। उन्होंने कहा कि विधानपरिषद संसदीय व्यवस्था के अध्ययन और ज्ञान को बढावा देने के लिए शताब्दी वर्ष में कई पुस्तकों का प्रकाशन कर रहा है।

2 टिप्‍पणियां:

श्यामल सुमन ने कहा…

अहाँक बात केर समर्थन करैत आश्वस्त करैत छी यथायोग्य सहयोग करब हरदम.
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
http://meraayeena.blogspot.com/
http://maithilbhooshan.blogspot.com/

Dr. Dhanakar Thakur ने कहा…

ताराबाबुक घोषणा नीक अछि मुदा मिथिला आन्दोलन करो लेल रुकल नहीं अछि वा रहत
२००० मे हमर सतत आग्रह पर ओ मिथिला आन्दोलनसं जुरल छलाह मुदा विधान परिषद्क सद्स्यताक बाद ओ मौन धारण केने छलाह जाहिसँ हुनक प्रशंसकवर्गमे हुनका प्रति एक आक्रोसक भावना देखना जिय अछि
यदि हुनक ई घोषणा ह्रदयसँ बिना आन राजनैतिक लाभ लेल छनि त हुनका एही लेल साधुवाद ओना किएक बेर पद छोरलासं अधिक काज होइत छैक यदि ओ पद उद्देश्यमे बाधक हो
डॉ धनाकर ठाकुर