पाकिस्तान की तरफ से अब मोबाइल के जरिए भी भारतमें जासूसी की जा रही है! अंतरराष्ट्रीय कानूनों को ताक पररखकर पाकिस्तान की सीमा से सटे राजस्थान के चारजिलों में धड़ल्ले से पाकिस्तान में मोबाइल सेवाएं देनेवाली कंपनियों के नेटवर्क पर बात हो रही है। सबसेचौंकाने वाली बात यह है कि यह सिलसिला पिछले दोसालों से चल रहा है, लेकिन भारतीय एजेंसियां इस मामलेमें अब तक कुछ भी नहीं कर पाई हैं।
राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर औरबीकानेर जिलों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), बीएसएनएल के अलावा स्थानीय प्रशासन ने पाकिस्तानकी टेलीकॉम कंपनियों के सिग्नल पकड़े हैं। इस मामले मेंकेंद्र सरकार और दूरसंचार सेवाओं की निगरानी करने वाली संस्था टीआरएआई (ट्राई) को जानकारी दे दी गई है।लेकिन अब भी नेटवर्क मिलने का सिलसिला जारी है।
पाकिस्तान के मोबाइल नेटवर्क की मौजूदगी का दो साल पहले बाड़मेर जिले में सबसे पहले पता चला था, जब वहांपर कुछ लोगों को पाकिस्तानी सिम कार्ड के साथ गिरफ्तार किया गया था। विजिलेंस और टेलीकॉम के जानकारोंकी एक टीम ने पिछले साल इस बात की पुष्टि भी कर दी थी। इस बात की पूरी आशंका है कि इस नेटवर्क काइस्तेमाल भारत के खिलाफ जासूसी के लिए किया जा जा रहा है। लेकिन बावजूद इसके सरकार ने मामले कोगंभीरता से नहीं लिया है और सिग्नल ब्लॉक नहीं किए गए हैं।
राजस्थान से सटी सीमा से करीब सौ किलोमीटर के दायरे में पाकिस्तानी मोबाइल कंपनियों के नेटवर्क मिल रहेहैं। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक सीमा के दोनों तरफ पांच मीटर से ज़्यादा के दायरे में किसी दूसरे देश कामोबाइल नेटवर्क काम नहीं करना चाहिए। बाड़मेर में पाकिस्तान की मोबाइल कंपनियों के सिमकार्ड धड़ल्ले सेइस्तेमाल हो रहे हैं। यही वजह है कि बाड़मेर जिला प्रशासन ने ऐसे सिमकार्डों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।
राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर औरबीकानेर जिलों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), बीएसएनएल के अलावा स्थानीय प्रशासन ने पाकिस्तानकी टेलीकॉम कंपनियों के सिग्नल पकड़े हैं। इस मामले मेंकेंद्र सरकार और दूरसंचार सेवाओं की निगरानी करने वाली संस्था टीआरएआई (ट्राई) को जानकारी दे दी गई है।लेकिन अब भी नेटवर्क मिलने का सिलसिला जारी है।
पाकिस्तान के मोबाइल नेटवर्क की मौजूदगी का दो साल पहले बाड़मेर जिले में सबसे पहले पता चला था, जब वहांपर कुछ लोगों को पाकिस्तानी सिम कार्ड के साथ गिरफ्तार किया गया था। विजिलेंस और टेलीकॉम के जानकारोंकी एक टीम ने पिछले साल इस बात की पुष्टि भी कर दी थी। इस बात की पूरी आशंका है कि इस नेटवर्क काइस्तेमाल भारत के खिलाफ जासूसी के लिए किया जा जा रहा है। लेकिन बावजूद इसके सरकार ने मामले कोगंभीरता से नहीं लिया है और सिग्नल ब्लॉक नहीं किए गए हैं।
राजस्थान से सटी सीमा से करीब सौ किलोमीटर के दायरे में पाकिस्तानी मोबाइल कंपनियों के नेटवर्क मिल रहेहैं। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक सीमा के दोनों तरफ पांच मीटर से ज़्यादा के दायरे में किसी दूसरे देश कामोबाइल नेटवर्क काम नहीं करना चाहिए। बाड़मेर में पाकिस्तान की मोबाइल कंपनियों के सिमकार्ड धड़ल्ले सेइस्तेमाल हो रहे हैं। यही वजह है कि बाड़मेर जिला प्रशासन ने ऐसे सिमकार्डों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।

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