बांग्लादेश में एक विशेष ट्राइब्यूनल 1971 में देश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए अत्याचारों के मामलों की सुनवाई बुधवार से राजधानी ढाका में करने जा रहा है. पहली बार उन लोगों के विरुद्ध मुक़दमा शुरू होने जा रहा है जो बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या और बलात्कार के दोषी हैं. जिन लोगों पर आरोप तय किए गए हैं उनमें से अधिकतर इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के सदस्य हैं. उन सभी ने आरोपों से इनकार किया है.
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार बांग्लादेश में 40 साल पहले हुए स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान 30 लाख से ज़्यादा लोग मारे गए थे जबकि हज़ारों महिलाओं के साथ पश्चिमी पाकिस्तान की सेना ने बलात्कार किया था. पिछले ही साल बांग्लादेश की सरकार ने ढाका में एक अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण की स्थापना की थी जिससे उन बांग्लादेशियों के विरुद्ध मुक़दमे चल सकें जिन्होंने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर लोगों पर अत्याचार किए थे.
अब तक सात लोग गिरफ़्तार हुए हैं जिनमें से दो मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के और पाँच जमात-ए-इस्लामी पार्टी के सदस्य हैं. ये विशेष अदालत जमात-ए-इस्लामी के एक नेता के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर बुधवार से सुनवाई करेगी. मगर दोनों ही विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप लगाया है. उन्होंने इस न्यायाधिकरण को राजनीतिक तौर पर दिखावा बताया है.
न्यूयॉर्क स्थित ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि ट्राइब्यूनल को अपनी प्रक्रिया में कुछ बदलाव करने होंगे जिससे मुक़दमा निष्पक्ष हो और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो. ये मुक़दमे कई महीनों तक चल सकते हैं और इससे पुराने ज़ख़्म हरे होने की भी आशंका है

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