प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोकसभा में कहा कि शांति बरकरार रखना सरकार का परम कर्तव्य है। अन्ना हजारे सशक्त लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर मंगलवार से अनशन पर हैं। अन्ना हजारे की गिरफ्तारी और रिहाई के मसले पर बयान देने की विपक्ष की मांग स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को लोकसभा में इस मसले पर बयान दिया। अन्ना हजारे ने बुधवार सुबह जेल से रिहा होने से इंकार कर दिया और वह अब तक वहीं बने हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अन्ना हजारे की गिरफ्तारी की रपट देना उनका दर्दनाक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक शख्स को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन उसका एक तरीका है। प्रधानमंत्री ने कहा, "अन्ना हजारे जी ने इस बात पर जोर दिया कि उनके नजरिए वाला लोकपाल विधेयक पारित किया जाए। दिल्ली सरकार को कानून एवं व्यवस्था बरकरार रखने के लिए कुछ प्रतिबंध लगाने के लिए बाध्य होना पड़ा।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकपाल विधेयक जल्द से जल्द पारित होना चाहिए, लेकिन बहस इस बात पर है कि कानून कौन बनाएगा। अन्ना हजारे की गिरफ्तारी के हालात का विवरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें 'उम्मीद है कि कल के घटनाक्रम की पुनरावृत्ति नहीं होगी।'
प्रधानमंत्री संसद को सुचारु रूप से चलने देने की अपील करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण कानूनों को पारित किया जाना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर देश की जनता के प्रति अन्याय होगा। प्रधानमंत्री ने अपने बयान में लोकसभा में कहा कि लोकसभा बिल संसद में पेश किया जा चुका है। बिल स्टैंडिंग कमिटी के पास चला गया है। इस पर अन्ना हजार ने अनिश्चितकालीन अनशन की घोषणा कर दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अनशन के लिए अन्ना ने दिल्ली पुलिस से जगह की मांग की। जिस पर दिल्ली पुलिस ने उन्हें अनशन स्थल के लिए अंडरटेकिंग मांगी। अन्ना ने 6 शर्तों पर अंडरटेकिंग देने से इंकार कर दिया। वे बिना शर्त जयप्रकाश नारायण पार्क में अनशन पर अड़ गए। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जेपी पार्क में धारा 144 लगा दिया, जिसे अन्ना और अन्ना के साथी तोड़ना चाहते थे। दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अन्ना हजारे और उनके दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया।
प्रधानमंत्री के वक्तव्य के दौरान विपक्षी सदस्यों की टोका-टाकी जारी रही। लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार ने सदस्यों से बार-बार अनुरोध किया कि वे प्रधानमंत्री को अपनी बात रखने दें।
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