मजबूत लोकपाल बिल को लेकर आमरण अनशन पर अटल सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हजारे को रक्तचाप संबंधी समस्या है। उनके सहयोगी मनीष सिसौदिया ने बताया कि अनशन से पहले अन्ना की रक्तचाप से संबंधित नियमित जांच हो रही है। अन्ना को शुक्रवार को गुड़गांव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अन्ना हजारे के 16 अगस्त से प्रस्तावित अनशन स्थल को लेकर ऊहापोह अब भी बरकरार है। टीम अन्ना को पुलिस ने शुक्रवार देर रात बताया कि सीपीडब्ल्यूडी उन्हें दो दिन की ही इजाजत देने को तैयार है। तीसरे दिन के लिए पुलिस उन्हें इस शर्त पर अनुमति दे सकती है टीम अन्ना उन्हें लिखित में दें कि वे 18 अगस्त की शाम ६ बजे पार्क खाली कर देंगे।
टीम अन्ना ने कहा कि पुलिस से इस बारे में औपचारिक पत्र मिलने के बाद कोर कमेटी में ही यह फैसला होगा कि अन्ना हजारे तीन दिन के लिए अनशन पर बैठेंगे या नहीं। इससे पहले शुक्रवार को दिनभर जयप्रकाश नारायण स्मृति पार्क में १६ अगस्त से प्रस्तावित अनशन की अनुमति के आवेदन की फाइल सरकारी महकमे में यहां से वहां घूमती रही। यह पार्क सीपीडब्ल्यूडी का है, उसने गुरुवार को अनुमति का आवेदन केंद्र के शहरी विकास मंत्रालय के पास भेज दिया। मंत्रालय ने उसे दिल्ली के उप-राज्यपाल के पास भेज दिया।
अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर सरकार अनशन की इजाजत नहीं देती है तो अन्ना गिरफ्तारी देंगे और जेल से ही उनका अनशन होगा। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम की बातचीत की पेशकश को भी छलावा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार मीडिया के जरिए बातचीत का राग छेड़ कर बस प्रचार पाना चाहती है। अगर वह वाकई बातचीत करना चाहती है तो इसकी पेशकश सीधे टीम अन्ना को की जानी चाहिए।
केजरीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए यह बात कही। चिदंबरम ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि सरकार अन्ना हजारे से बातचीत करने के लिए तैयार है। गृह मंत्री ने कहा कि अन्ना के अनशन का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा, ‘बातचीत में हिस्सा लेने पर फैसला करना हजारे पर निर्भर करता है।’ लेकिन केजरीवाल ने कहा कि बातचीत का न्यौता आए तब तो फैसला करने या नहीं करने की बात आएगी। केजरीवाल दिल्ली, भोपाल, अहमदाबाद, चंडीगढ़, इंदौर, रांची, औरंगाबाद में बैठे छात्र नेताओं से वीडयो कांफ्रेंसिंग के जरिए मुखातिब थे। उन्होंने इन छात्रों के जन लोकपाल से जुड़े तमाम सवालों के जवाब दिए।
केजरीवाल ने कहा कि लोकपाल को लेकर मीडिया में सारी बहस प्रधानमंत्री को इसके दायरे में लाए जाने या बाहर रखने पर केंद्रित हो गई है। जबकि वास्तविकता यह है कि हमारी प्राथमिकता सूची में यह मांग काफी नीचे है। उन्होंने कहा कि सरकार ने लोकपाल बिल का जो ड्राफ्ट पेश किया है, उसमें हमारी 72 में सिर्फ 12 मांगें मानी गई हैं। इसके उलट, सरकार प्रचार कर रही है कि 40 में से 34 मांगें मान ली गई हैं। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी मांग यह है कि आम आदमी के साथ होने वाले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने से संबंधित हमारे प्रस्ताव को सरकारी ड्राफ्ट में शामिल किया जाए।
अन्ना के आंदोलन को अमेरिका सहित दुनिया भर से समर्थन मिल रहा है। ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ संगठन के सदस्यों ने अन्ना हजारे के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र की इमारत के बाहर प्रदर्शन किया। इन्होंने सरकारी लोकपाल बिल को ‘मजाक’ करार देते हुए इसे भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने वाला बताया। अमेरिका की ओर से शुक्रवार को इस बारे में आधिकारिक टिप्पणी भी आ गई। इसका भारत सरकार, कांग्रेस और भाजपा ने सख्त विरोध किया है।
अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता विक्टोरिया नूलैंड ने कहा कि हम पूरी दुनिया में शांतिपूर्ण, अहिंसक विरोध-प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करते हैं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। हम चाहेंगे कि भारत शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन से निपटने में लोकतांत्रिक तरीके से उचित संयम बरते। उनसे पूछा गया था कि भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ अहिंसक प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस अत्याचार कर रही है। अमेरिकी टिप्पणी पर सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे गैरजरूरी कहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हमने अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता की गैरजरूरी टिप्पणी देखी है। भारतीय संविधान में शांतिपूर्वक सभा आयोजित करने के साथ ही भाषण एवं अभिव्यक्ति की आजादी दी गई है। इसका देश के 1.2 अरब लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा ने भी अमेरिकी बयान की निंदा की है।

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