राष्ट्रमंडल खेल घोटाले में हर भ्रष्टाचार के लिए सुरेश कलमाडी को जिम्मेदार ठहराने वालीं शीला दीक्षित अब खुद कैग (सीएजी) के निशाने पर हैं। सीएजी ने राष्ट्रमंडल खेल घपलों पर तैयार अपनी रिपोर्ट में 80 पन्ने सिर्फ शीला सरकार की गड़बड़ियों पर लिखे हैं, जिनमें 46 बार मुख्यमंत्री का नाम आया है। चाहे मामला खेलों के दौरान दिल्ली की सड़कों को रोशन करने का हो या फिर हरियाली बढ़ाने का, हर बात में सीएजी को घोटाले की बू आ रही है। सूत्रों की मानें, तो सीधे मुख्यमंत्री को करोड़ों रुपयों के नुकसान का जिम्मेदार ठहराया गया है।
राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान आठ सौ किलोमीटर लंबी सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें लगनी थीं। सूत्रों के मुताबिक सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि सरकार ने विदेशी लाइटों को कई गुना महंगे दामों पर खरीदा। मुख्यमंत्री की हरी झंडी के बाद ही विदेशी स्ट्रीट लाइटों की खरीद को हरी झंडी मिली। हर विदेशी लाइट की खरीद पर 25 हजार 704 रुपए से लेकर 32 हजार तक का भारी अंतर पाया गया। सीएजी ने कहा कि पीडब्ल्यूडी, एमसीडी और एनडीएमसी ने विदेशी लाइटों की खरीद पर 31 करोड़ सात लाख रुपए से ज्यादा फूंके। देश में बनी जो स्ट्रीट लाइटें 15 हजार 160 रुपए की कीमत पर मिल रही थीं, विदेश में बनी उसी स्ट्रीट लाइट को 32 हजार रुपए तक में खरीदा गया।
1 टिप्पणी:
कोई किसी भी निशाने पर आ जाये लेकिन इनका बिगड़ता कभी कुछ नहीं।
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