बिहार पुलिस भले ही आपराधिक घटनाओं में कमी का दावा करती हो लेकिन राज्य में जाली नोटों का काला धंधा तेजी से फल-फूल रहा है. इस वर्ष अब तक जाली नोटों से सम्बंधित 23 मामले दर्ज किए जा चुके हैं जबकि करीब तीन लाख रुपये के जाली नोट बरामद किए गए हैं. जाली नोटों का कारोबार करने वालों की पहली पसंद 500 और 1000 रुपये के बड़े नोट हैं.
पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार जाली नोट के कारोबार का विस्तार पिछले तीन वर्षों में काफी बढ़ा है. माना जाता है कि भारत-नेपाल सीमा जाली नोटों के धंधे का मुख्य क्षेत्र है. मुख्य रूप से नेपाल के रास्ते ही जाली नोट बिहार पहुंचते हैं.
आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष जून तक राज्य के विभिन्न थानों में जाली नोटों से सम्बंधित 23 मामले दर्ज किए गए जबकि 2.73 लाख रुपये से ज्यादा के जाली नोट बरामद किए गए. इसी तरह इसके पूर्व के वर्षों में 2010 में जाली नोटों के 57, वर्ष 2009 में 66 तथा 2008 में 40 मामले पुलिस के सामने आए थे. वर्ष 2008 में 1.96 लाख रुपये के जाली नोट बरामद किए गए थे. आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2007 में करीब 94,000 रुपये के ही जाली नोट जब्त किए गए थे.
पुलिस का मानना है कि इस मामले में उनकी सक्रियता बढ़ी है. राज्य के पुलिस अधिकारी बताते हैं कि जाली नोटों का कारोबार करने वालों का कोई कोड होता है. वह कहते हैं कि जाली नोटों में भी ऑरिजनल होता है जिसे आईएसआई (ऑरिजनल नकली नोट) कहा जाता है, जो असली नोट से काफी मिलता-जुलता है. इसके अलावा कई जाली नोट अन्य क्षेत्रों में भी तैयार किए जाते हैं जिसे पकड़ पाना आईएसआई से आसान होता है. वह कहते हैं कि आईएसआई किस्म का जाली नोट नेपाल के रास्ते ही बिहार में आता है.
राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक राज्यवर्धन शर्मा कहते हैं कि जाली नोटों से बचने के लिए सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को इस मामले का वृत्तचित्र बनाकर सीडी भेजी गई है जिसका प्रदर्शन हाट-बाजारों में किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस वृत्तचित्र में जाली नोटों को पहचानने के तरीके और उनसे बचने के तरीके बताए गए हैं. उन्होंने बताया कि जिलों में एंटी फेक करेंसी सेल का भी गठन किया गया है और नेपाल सीमा पर जाली नोट पकड़ने वाली मशीन भी लगाई गई है. जाली नोटों के जानकार कहते हैं कि आईएसआई कॉटन रेक्स पेपर के बने होते हैं. वह कहते हैं कि असली नोट में खुरदुरापन होता है जबकि नकली नोट में खुरदुरापन गायब रहता है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि गौर से देखा जाए तो नकली नोटों में कई प्रकार की खामियां होती हैं. वह यह भी मानते हैं कि बड़े नोटों में नकली होने की ज्यादा सम्भावना रहती है. वह कहते हैं कि जाली नोट के धंधे में लगे लोग बड़े नोट का ही ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि ये आसानी से ले जाए जा सकते हैं.
आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2008 से 2011 के जून तक एक हजार के 2865 जबकि पांच सौ के 4781 जाली नोट बरामद किए गए. ऐसा नहीं है कि 100 के जाली नोट बाजार में नहीं आ रहे हैं. पिछले पांच वर्षों में 13 हजार से ज्यादा सौ रुपये के जाली नोट बरामद किए गए हैं.

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