अमेरिका का कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा भारत पर हमले की तैयारी कर रहा है। उसका मानना है कि संगठन कश्मीर में सक्रिय है। साथ ही जैश-ए-मोहम्मद और हरकत-उल-मुजाहिद्दीन जैसे संगठनों संग गठजोड़ भी कर रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने आतंकवाद पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है।
साथ ही पाक में आतंकियों को मिलने वाली शरण पर भी अमेरिका ने चिंता जताई है। विदेश विभाग ने कहा, ‘लश्कर पाकिस्तान के भीतर से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। पाक सरकार ने संगठन पर भले ही प्रतिबंध लगा दिया हो लेकिन हम चाहते हैं कि वो इस पर और सख्त कार्रवाई करे।’
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2010 के दौरान भारत में आतंकवाद के चलते कम लोगों की मौतें हुईं। भारत की बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद विरोधी नीतियों से यह संभव हो सका है। लेकिन साथ ही कहा कि भारत अभी भी विश्व में सर्वाधिक आतंकवाद पीड़ित देशों में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘2010 में आतंकवादी घटनाओं से मारे जाने वालों की संख्या काफी कम है। लेकिन अब तक इन घटनाओं में 1900 लोग मारे जा चुके हैं। कश्मीर में लगातार जारी हिंसा और सीमा पार हो रही घुसपैठ भी भारत के लिए चिंता का विषय है।’
पाक में मौजूद अल-कायदा संगठन कमजोर हुआ है। लेकिन लश्कर, तहरीक-ए-तालिबान और हक्कानी नेटवर्क जैसे संगठनों से उसकी नजदीकियां खतरनाक है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘सभी संगठन आपस में संसाधनों का बंटवारा कर रहे हैं। यह नजदीकियां दक्षिण एशिया के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं।’
साथ ही इस रिपोर्ट में अमेरिका ने क्यूबा, ईरान, सूडान और सीरिया को आतंकवाद प्रायोजक देशों की सूची में बरकरार रखा है। विदेश सचिव हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि ये देश लगातार आतंकियों की मदद कर रहे हैं। इसके चलते इन देशों पर कई तरह के प्रतिबंध भी बरकरार रहेंगे।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें