
कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री बी.एस.येदयुरप्पा ने कहा है कि वह अगले 6 महीने में फिर वापस लौटेंगे। उन्होंने मंगलवार को अवैध खनन मामले में उन्हें दोषी ठहरानेवाली लोकायुक्त की रिपोर्ट को खारिज करने के लिए हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की। हमारे सहयोगी चैनल टाइम्स नाउ ने खबर दी है कि येदयुरप्पा ने कहा है, 'मैं अगले 6-12 महीने में फिर लौटूंगा।' येदयुरप्पा ने अवैध खनन मामले में उन्हें दोषी ठहरानेवाली लोकायुक्त की रिपोर्ट को खारिज करने के लिए हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की।
येदयुरप्पा ने कहा कि प्रेरणा एजुकेशन सोसाइटी से मिले 10 करोड़ रुपये के दान के मुद्दे पर अगर उन्हें नोटिस दिया गया होता तो लोकायुक्त रिपोर्ट का निष्कर्ष कुछ और होता। प्रेरणा एजुकेशन सोसाइटी नाम के ट्रस्ट का मैनेजमेंट येदियुरप्पा के परिवार के सदस्य करते हैं। उन्होंने खुद को ट्रस्ट से दूर रखने की कोशिश की। उन्होंने कहा, 'जहां तक ट्रस्ट को दिए गए दान का सवाल है तो साफ तौर पर मैं कहता हूं कि मैं ट्रस्ट का हिस्सा नहीं हूं। मैं प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर कभी भी ट्रस्ट के मामलों में शामिल नहीं रहा। मेरा ट्रस्ट में कोई दखल नहीं है।'
रिपोर्ट के निष्कर्षो की समीक्षा की मांग करते हुए येदयुरप्पा ने कहा कि लोकायुक्त द्वारा उन्हें आरोपित करने से उनपर जो दाग लगा है वह हमेशा उन्हें परेशान करता रहेगा। उन्होंने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए एक अवसर देने की मांग की है। लोकायुक्त रिपोर्ट के मुताबिक जिंदल समूह के स्वामित्व वाली साउथ वेस्ट माइनिंग कंपनी ने ट्रस्ट को 10 करोड़ रुपये दान में दिए थे। वहीं, जिंदल स्टील ने एक एकड़ जमीन बेंगलुरु के बाहरी इलाके में येदयुरप्पा के परिवार के सदस्यों से 20 करोड़ रुपये में खरीदी, जबकि सरकार ने इसकी कीमत एक करोड़ 40 लाख रुपये निर्धारित की थी।
येदयुरप्पा ने कहा कि रिपोर्ट में पाया गया है कि उन्होंने नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया है क्योंकि उन्होंने साउथ वेस्ट माइनिंग कंपनी और जिंदल स्टील को खनन का कोई लाइसेंस नहीं दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि लोकायुक्त इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते कि वह बाद में इन दोनों फर्मों के पक्ष में मनमुताबिक आदेश देंगे।
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