राज्यसभा में बुधवार को पहली बार किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग कार्यवाही शुरू हुई और कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सौमित्र सेन के खिलाफ प्रस्ताव पर विचार करने के लिए सदन को एक अदालत में तब्दील कर दिया गया।
न्यायमूर्ति सेन सदन के एक द्वार पर विशेष रूप से बनाए गए बार में पेश हुए। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने उनके खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में सेन के खिलाफ लगाए गए आरोपों में उच्च न्यायालय द्वारा रिसीवर नियुक्त किए जाने पर बड़े पैमाने पर कोष में हेराफेरी शामिल है। इसके साथ ही उन पर धन की हेराफेरी के मामले में गलत तथ्य पेश करने का आरोप है।
प्रस्ताव पेश करते हुए येचुरी ने कहा कि उन्हें ऐसा करते हुए बहुत क्षोभ हो रहा है। यह प्रस्ताव न्यायपालिका के खिलाफ नहीं है, जिसका कि हम काफी सम्मान करते हैं, बल्कि एक न्यायाधीश के गलत व्यवहार के खिलाफ है। सेन दूसरे ऐसे न्यायाधीश हैं जिनके खिलाफ महाभियोग कार्यवाही शुरू की गयी है। पहला ऐसा मामला उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी रामास्वामी के खिलाफ मई 1993 में लोकसभा में लाया गया था जो कांग्रेस के सदस्यों के मत विभाजन में भाग नहीं लेने पर गिर गया था।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें