प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दो दिवसीय यात्रा पर बांग्लादेश पहुंच गए हैं। प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान दोनों देश प्रत्यर्पण संधि, संपर्क बढ़ाने, बिजली तथा सीमा प्रबंधन समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत बनाने संबंधी समझौते करेंगे। इन समझौतों से दोनों के बीच संबंध बेहतर होने की उम्मीद है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आपत्ति के कारण तीस्ता नदी के जल बंटवारे से जुड़े समझौते पर हस्ताक्षर को लेकर अनिश्चितता है। मुख्यमंत्री भी प्रधानमंत्री के साथ बांग्लादेश जाने वाली थीं, लेकिन बाद में उन्होंने न जाने का मन बनाया। राजनयिक सूत्रों ने बताया कि संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए दोनों देश दीर्घकालिक मसौदा समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
बांग्लादेश और भारत ने 19 मार्च 1972 को मैत्री, सहयोग तथा शांति समझौते पर दस्तखत किए थे। जब यह संधि 1997 में समाप्त होने वाली थी, तब दोनों देशों ने इसे आगे बढ़ाने से मना कर दिया। सूत्रों के मुताबिक मसौदा समझौता संबंधों की प्राथमिकता की पहचान के साथ एक मजबूत बुनियाद उपलब्ध कराएगा।
बांग्लादेश दौरे पर जाने की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री ने बयान में सुरक्षा, सीमा मुद्दा, जल संसाधन, बिजली, संपर्क, सीमावर्ती ढांचागत सुविधा में सुधार, व्यापार सुविधा तथा आर्थिक सहयोग को एजेंडा बताया। उन्होंने कहा कि रिश्तों को मजबूत बनाने तथा उसे सकारात्मक गति देने के लिए प्रयास किए जाएंगे। अपनी यात्रा के दौरान सिंह बांग्लादेश में अपनी समकक्ष शेख हसीना के साथ बातचीत करेंगे। वह राष्ट्रपति जिल्लुर रहमान से भेंट करेंगे तथा विपक्षी नेता बेगम खालिदा जिया तथा पूर्व तानाशाह एवं जातीय पार्टी के प्रमुख हुसैन मोहम्मद इरशाद के साथ भी बैठक करेंगे।
बांग्लादेश के लिए जहां सीमा संबंधी मामले, जल संसाधन, बाजार पहुंच तथा बिजली खरीद महत्वपूर्ण है वहीं पारगमन तथा सुरक्षा भारत के लिए प्रमुख चिंता का विषय है। सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हुए मनमोहन सिंह और शेख हसीना के बीच बुधवार को ढा़का में बातचीत के बाद दोनों पक्ष प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। ऐसा समझा जाता है कि उल्फा के शीर्ष नेता अनूप चेतिया अभी बांग्लादेश में हैं। प्रत्यर्पण संधि के बाद चेतिया को भारत भेजा जा सकता है।
दोनों देश फेनी नदी से जुड़ी भारत की पेयजल परियोजना तथा बांग्लादेश द्वारा 20 साल के लिए 250 मेगावाट बिजली तरजीही दर पर खरीदने को लेकर समझौता कर सकते हैं। इसके अलावा बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय बाजार दर पर 250 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए समझौता कर सकता है। इसके अलावा दोनों देश 1974 के मुजिब-इंदिरा लैंड बाउंड्री समझौता पर पैकेज प्रोटोकाल पर दस्तखत कर सकते हैं।
व्यापार को बढ़ावा देने के इरादे से भारत, बांग्लादेश के 61 उत्पादों को शुल्क मुक्त प्रवेश की अनुमति देने के लिए सहमति पत्र पर दस्तखत कर सकता है। इन उत्पादों में अधिकतर परिधान होंगे। सहमति पत्र पर दस्तखत दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के तहत किया जाएगा। प्रधानमंत्री की यात्रा से पहले विदेश सचिव रंजन मथाई ने कहा कि 12 साल बाद यह पहला मौका है जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री बांग्लादेश की यात्रा पर जा रहा है। इस यात्रा का मकसद जनवरी 2010 में हसीना की यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों में आयी गति को नई ऊंचाई पर ले जाना है।
ढा़का रवाना होने से पहले अपने बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में स्थिरता तथा समृद्धि के लिए बांग्लादेश के साथ संबंध हमारे लिए खासा महत्वपूर्ण है। मनमोहन के साथ चार पूर्वोत्तर राज्यों: असम, त्रिपुरा, मेघालय तथा मिजोरम के मुख्यमंत्री भी ढा़का गए हैं। सुदंरबन में बाघों की रक्षा के लिए दोनों देश एक प्रोटोकाल पर दस्तखत कर सकते हैं। इसके अलवा दोनों पक्ष सुंदरबन में जैवविविधता को बनाये रखने के लिए सहमति पत्र पर दस्तखत कर सकते हैं।
भारत और बांग्लादेश अक्षय ऊर्जा, दूरदर्शन तथा सरकारी बांग्लादेश टीवी के कार्यक्रमों के प्रसारण, मतस्य क्षेत्र में सहयोग तथा ढा़का विश्वविद्यालय एवं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के बीच सहयोग के लिए भी सहमति पत्र पर दस्तखत कर सकते हैं। बांग्लादेश के रोहनपुर (छपाई नवाबगंज) तथा भारत के सिंगाबाद के रास्ते नेपाल जाने को लेकर भी दोनों देश समझौता कर सकते हैं। अखारा तथा अगरतला के बीच रेलवे संपर्क बहाल करने के लिए भी समझौता होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच पारगमन के मुद्दे पर मौजूदा व्यापार समझौते के तहत दस्तखत हो सकते हैं। इसके अंतर्गत तीन मुद्दे- बांग्लादेश के चटगांव तथा मंगला बंदरगाह के इस्तेमाल तथा सड़क एवं रेलवे शामिल हैं।

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