पेट्रोल का दाम फिर बढ़ सकता है. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

पेट्रोल का दाम फिर बढ़ सकता है.


पेट्रोल के दाम में एक और इजाफे की आशंका जताते हुए देश की सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल ने कहा है कि संभव है कि तीन महीने बाद लोगों को पेट्रोल पंपों पर लंबी कतार में भी खड़ा होना पड़े। कंपनी की खराब आर्थिक सेहत और उधार लेने की हद तक पहुंचने का हवाला देते हुए कंपनी के सीएमडी आरएस बुटोला ने कहा कि अगर सरकार से सहायता नहीं मिलती है तो कंपनी अगले तीन महीने तक किसी तरह बाजार से रुपया लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार से तेल आयात कर सकती है। लेकिन उसके बाद की स्थिति को लेकर वह आशंकित है। ऐसा होने पर कंपनी को अपनी कुछ रिफाइनरी में काम रोकना होगा। इससे पंपों पर सप्लाई कम होगी और लोगों को कतार में खड़ा होना पड़ सकता है। हालांकि बुटोला ने एक दिन पहले ही कहा था कि अगर अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों  में गिरावट का दौर रहा तो अगले सप्‍ताह भारत में भी पेट्रोल के दाम  कम हो सकते हैं. 

बुटोला ने डीजल, एलपीजी, मिट्टी तेल की बिक्री से होने वाले नुकसान का हवाला देते हुए कहा कि इनके दाम को भी सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर देना चाहिए। जनता को उस पदार्थ का मूल्य चुकाना चाहिए, जिसका वे उपयोग कर रहे हैं। बुटोला ने कहा कि त्वरित आधार पर यह बुरा लग सकता है लेकिन दीर्घकाल में यही आर्थिक हित में है। उन्होंने कहा कि डीजल पर अभी प्रति लीटर 8.58 रुपए, मिट्टी तेल पर 25.66 रुपए प्रति लीटर और एलपीजी प्रति सिलेंडर पर 260.50 रुपए का घाटा हो रहा है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल पर भी प्रति लीटर 2 पैसे का घाटा हो रहा है। घाटे पर इन पदार्थों को बेचने से कंपनी को प्रतिदिन 4 लाख रुपए से अधिक का घाटा हो रहा है।  

 इंडियन ऑयल की दूसरी तिमाही के आर्थिक नतीजों को सार्वजनिक करते हुए बुटोला ने कहा कि दूसरी तिमाही में (जुलाई-सितंबर) अब तक के सबसे खराब वित्तीय नतीजे आए हैं। इस दौरान 7485.55 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। पिछले साल इसी समयावधि में कंपनी को 5 हजार करोड़ रुपए से अधिक का लाभ हुआ था।   आरएस बुटोला ने कहा कि यह शायद तेल के दाम में वृद्धि का ही असर है कि सितंबर-अक्टूबर के त्योहारी मौसम को अगर छोड़ दें तो पेट्रोल की खरीदारी में गिरावट दर्ज की गई है। इस दौरान जहां खरीदारी की बढ़त दर 9 प्रतिशत से अधिक रहता है वहीं इस साल यह 6.1 प्रतिशत तक ही रहा। उन्होंने कहा कि डीजल की खरीदारी में गिरावट तो नहीं आई लेकिन इसमें इजाफा दर्ज नहीं किया गया। यह 5-6 प्रतिशत तक ही सीमित रहा। देश में करीब 13 मिलियन पेट्रोल की खपत है। इसमे से करीब आधे की बिक्री इंडियन ऑयल के पंपों से होती है। 

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