
17वें सार्क शिखर सम्मेलन में शिरकत कर रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान के इतिहास में नया अध्याय जोड़ने का वक्त आ गया है। दोनों देशों ने मोस्ट फेवर्ड नेशन स्टेटस (एमएफएन) के आधार पर द्विपक्षीय व्यापार पर सहमति भी जताई। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि गिलानी को हमेशा से अमन पसंद (शांति का मसीहा) माना है।
मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी सार्क शिखर सम्मेलन के इतर शांगरीला रिसॉर्ट में मिले। दोनों के बीच घंटे भर चली बैठक में जल्द से जल्द उदार वीजा तंत्र की स्थापना का फैसला और 2005 से परिदृश्य से गायब भारत-पाकिस्तान जॉइंट कमिशन को फिर से अस्तित्व में लाने का फैसला किया गया। पिछले 18 महीनों में दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच यह तीसरी मुलाकात है। थिंपू में 2010 में हुए सार्क शिखर सम्मेलन में दोनों ने द्विपक्षीय संवाद को दोबारा शुरू करने का फैसला किया था। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्होंने गिलानी को हमेशा से अमन पसंद माना है। बैठक के बाद बातचीत के दौरान सिंह ने कहा कि वह बहुत खुश हैं कि गिलानी ने उनकी यह बात मानी कि दोनों देशों के पास नायाब मौका है, इसलिए बातचीत का अगला दौर और ज्यादा नतीजे देने वाला होना चाहिए।
सिंह ने कहा, 'हमने इस उम्मीद के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने का फैसला किया है कि दोनों मुल्कों के रिश्तों में दिक्कतें पैदा करने वाले सभी मुद्दों पर ईमानदारी से बातचीत की जा सकती है।' प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों मुल्कों के लोगों की तकदीरें एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। गिलानी ने कहा कि सिंह के साथ पानी, आतंकवाद, सरक्रीक, सियाचिन, कारोबार और कश्मीर जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि बातचीत का अगला दौर और ज्यादा रचनात्मक, सकारात्मक होगा। वह दोनों देशों के इतिहास में नया अध्याय खोलेगा।' उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यता और यूरोपीय यूनियन में शामिल देशों के बाजारों तक पहुंच की पाकिस्तानी मुहिम को समर्थन देने के लिए भारत का शुक्रिया भी अदा किया।
विदेश सचिव रंजन मथाई के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कहा कि 26/11 के मुंबई हमले की साजिश रचने वालों को कानून के दायरे में लाना बेहद जरूरी है। आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई में इस संदर्भ में सभी कदम उठाए जाएंगे।
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