चीन ने भारत की सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलओसी) के इलाके में मिसाइल जमा करने वाले कम से कम दो भंडार बना रखा है। वहीं पाकिस्तान गुपचुप तरीके से भारत से सटी सीमा पर अपनी सैन्य ताकत बढ़ाता जा रहा है। 2003 में हुए युद्धविराम के बाद पाकिस्तान ने अब तक 162 बैरक और 97 अतिरिक्त निगरानी पोस्ट बना लिए हैं।
एक संसदीय दल इस नतीजे पर पहुंचा है। संसदीय दल ने सरकार को कई सुझाव दिए हैं ताकि पाकिस्तान की तरफ से उठाए जा रहे कदमों के जवाब में भारत की तैयारी भी पुख्ता हो। आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी संसद की स्थायी समिति ने सुझाव दिया है कि सीमा से सटे भारत अपनी जमीन पर एक बांध बनाए। समिति की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान से सीमा पर ज़्यादातर निर्माण नवंबर, 2003 को युद्धविराम की घोषणा के बाद पिछले 8 सालों में कराया है। बीजेपी सांसद एम. वेंकैया नायडू की अगुवाई वाली समिति ने राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी को 3 नवंबर को यह रिपोर्ट सौंप दी है।
इस रिपोर्ट में सरकार की तरफ से की जा रही तैयारी के अलावा कैबिनेट कमिटी ऑन सेक्योरिटी (सीसीएस) द्वारा बांधनुमा मचान (नकाकुम मचान) बनाए जाने पर सक्रियता से विचार किए जाने का जिक्र है। रिपोर्ट में इसके अलावा जम्मू में सड़क बनाए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार ने संसदीय समिति के उस निष्कर्ष पर कोई टिप्पणी नहीं की है, जिसमें सीमा के 60-62 किलोमीटर की लंबाई की रक्षा के लिए सिर्फ एक बटालियन (1,000 जवान) की तैनाती की जाती है, जिससे क्षमता पर असर पड़ता है। समिति ने सीमा पर उन फ्लडलाइटों और तारों को बदलने का भी सुझाव दिया है, जो खराब हो चुके हैं या जल्द खराब हो सकते हैं।
भारत पाकिस्तान की क्रूज मिसाइल बाबर को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए जल्द ही अपनी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल निर्भय का परीक्षण करेगा। निर्भय की मार करने की क्षमता बाबर से दोगुनी है। निर्भय जहां 1000 किलोमीटर तक दुश्मन के ठिकाने पर अचूक वार कर सकती है वहीं बाबर की क्षमता महज 500 किलोमीटर है। निर्भय रडार की पकड़ से बाहर है। जनवरी-फरवरी, 2012 तक इस मिसाइल के परीक्षण की संभावना जताई गई है। चीन ने भी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास मोर्चेबंदी तेज कर दी है। जम्मू-कश्मीर स्थित लद्दाख के उत्तरी हिस्से में मौजूद सबसे पुराने सिल्क रूट के नजदीक चीन ने मिसाइलों के दो भंडार बना लिए हैं।
इस इलाके से सटे चीन के जिनजियांग राज्य में रक्षा निर्माण गतिविधियां चल रही हैं। उत्तरी लद्दाख से सटे चीन के इस इलाके में पडो़सी देश की सेना द्वारा किए जा रहे निर्माण का पता तीन महीने पहले ही चला है। सेटेलाइट से मिली तस्वीरों से साफ है कि लद्दाख और जिनजियांग के बीच कराकोरम दर्रे से महज 98 किलोमीटर दूर चीन के पीपल्स लिबरेशन आर्मी के पुराने बेस जियादुल्ला में 13 सुरंगें बनाई गई हैं। भारतीय सेना भी पडो़सी देश की इन तैयारियों को हल्के में नहीं ले रही है। भारतीय सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के नजदीक ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों की तैनाती का प्रस्ताव भेजा है। भारत ने उत्तरी लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी के नजदीक तेजी से बुनियादी ढांचे का निर्माण शुरू कर दिया है।

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