केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ ने राजधानी दिल्ली के मौजूदा मास्टर प्लान-2021 को बनाने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्लान बंद कमरे में बैठकर बनाया गया है. इससे राजधानी की 50 से 60 फीसद जनता को कोई लाभ नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि ऐसा कानून लाया जाएगा. जिससे लोगों को कोई असुविधा न हो. स्पेशल एरिया की भी पुनर्समीक्षा की जाएगी. जिससे 50 साल पुराने निर्माण को बचाया जाए.
केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने कहा कि राजधानी की 30 साल पुरानी, मौजूदा और दस साल आगे की स्थिति पर नजर डालें तो स्थिति एक दम बदली नजर आएगी. तेजी से बढ़ी आबादी के चलते राजधानी और अधिक जनसंख्या घनत्व का बोझ ढ़ोने की स्थिति में नहीं है.
राजधानी की आने वाले समय में क्या स्थिति होगी, इसे चुनौती के रूप में लेना होगा और इसमें बदलाव के लिए राजधानी की क्षमता को बढ़ाने की जरूरत है. इसलिए मास्टर प्लान-2021 की पुनर्समीक्षा जरूरी हो गई है. कमलनाथ ने सरोजनी नगर की मौजूदा स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दस साल पहले यह स्थिति नहीं थी. हमें असलियत को देखना होगा. पुराने घर और बाजार के लोग परेशान न हों. हालांकि सुरक्षा और मजबूती का पूरा ध्यान रखकर नया रास्ता तलाशना होगा. उन्होंने कहा कि अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मौजूदा मास्टर प्लान बंद कमरे में बैठकर बनाया गया है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यमुना पार इलाके का भी तेजी से विकास हुआ है. नोएडा, गुड़गांव बसा है. ऐसे ही और शहर बसाने की जरूरत है. जब तक कोई ठोस योजना नहीं बनेगी, दिल्ली का बोझ कम नहीं होगा. राजधानी में आज करीब एक करोड़ वाहन सड़कों पर हैं. इसके लिए सड़कों की स्थिति भी सुधारनी होगी. ऐसी कोशिश होनी चाहिए कि दिल्ली का विकास और खूबसूरती दोनों बरकरार रहें. प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आज इसी का जमाना है. सरकार को पैसा लगाने की जरूरत नहीं है.
कमलनाथ ने एनडीएमसी, एमसीडी और डीडीए से कहा कि वह पीपीपी के माध्यम से राजधानी में ऐसे प्रोजेक्ट लाएं. यह प्रोजेक्ट पार्किग के अलावा भी हो सकते हैं. जिससे राजधानी के लोगों को फायदा हो, और खूबसूरती बढ़े. तीनों एजेंसियों से उन्होंने कहा कि परिवर्तन की जरूरत है. इसे बदले हुए नजरिये से देखना होगा.

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