अमेरिका के साथ भारत का द्विपक्षीय रिश्ता. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

अमेरिका के साथ भारत का द्विपक्षीय रिश्ता.


पूर्व विदेश सचिव और वाशिंग्टन में भारतीय राजदूत निरूपमा राव ने कहा है कि भारत और अमेरिका के रिश्ता बदलाव के अदभुत दौर से गुजरने के बाद वैश्विक आयाम में अब एक सामरिक रणनीति के रूप में तब्दील हो चुका है। 

अमेरिकन यूनिवर्सिटी में बदलती दुनिया में भारत की भूमिका नामक विषय पर व्याख्यान में निरूपमा ने कहा, अमेरिका के साथ हमारा द्विपक्षीय रिश्ता अदभुत परिवर्तन का साक्षी बना है और अब वैश्विक आयाम में सामरिक साझेदारी का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि हमारी बहुआयामी सामरिक साझेदारी रणनीतिक एवं आर्थिक हितों की बुनियाद पर टिकी है। हमारे लोगों और कारोबारों के बीच व्यापक रिश्ते हैं। दोनों बड़े लोकतंत्र हैं और उनके मूल्य भी समान हैं।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की 2009 में अमेरिका यात्रा और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पिछले साल की भारत यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा आयाम साबित हुई है। निरूपमा ने कहा कि आज के समय में हम सिर्फ सामरिक सहयोग, आतंकवाद विरोधी लड़ाई, रक्षा, उच्च तकनीक, असैन्य परमाणु एवं अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग पर ही नहीं, बल्कि विकास से जुड़े व्यापाक मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। विदेश सचिव ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, मौसम का अनुमान जैसे मुद्दों पर भी बातचीत चल रही है, जो दोनों देशों की जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में दुनिया के साथ भारत का संपर्क बढ़ा है वह अब विश्व विकास में योगदान दे रहा है।

कोई टिप्पणी नहीं: