विनोद कांबली ने विश्व कप 1996 में श्रीलंका के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में कुछ ‘कुछ गड़बड़ी’ का संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि तत्कालीन कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन के पहले क्षेत्ररक्षण के फैसले से वह काफी हैरान थे.
भारत की तरफ से 17 टेस्ट मैच में 1084 रन और 104 वनडे में 2477 रन बनाने वाले कांबली ने इसके साथ ही कहा कि यदि कुछ गड़बड़ी हुई थी तो उसका तत्कालीन कोच अजित वाडेकर को पूरा पता था. कांबली ने दावा किया कि पूरी टीम ने पहले ही फैसला कर लिया था कि टॉस जीतने पर पहले बल्लेबाजी की जाएगी लेकिन अजहरूद्दीन के पहले क्षेत्ररक्षण के फैसले पर उन्हें संदेह हुआ था.
आईसीसी की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई के पूर्व अध्यक्ष पाल कोंडोन ने हाल में बयान दिया था कि नब्बे के दशक में क्रिकेट खेलने वाले अधिकतर देश मुख्य मैचों को फिक्स करने में लिप्त थे. कांबली ने कहा, मैंने देश से या टीम से कभी गद्दारी नहीं की लेकिन आज मेरा मन हल्का हो गया पर मैं ये 1996 (विश्व कप सेमीफाइनल) का मैच कभी नहीं भूल सकता क्योंकि इस मैच के बाद मेरा कैरियर खत्म हो गया. उन्होंने कहा, मैं हैरान हो गया था कि हमने पहले क्षेत्ररक्षण का फैसला क्यों किया. हम चैंपियन बनने वाले थे. हमने पूरे टूर्नामेंट में बढ़िया क्रिकेट खेली थी लेकिन यह मैच रद्द कर दिया गया. मैं एक छोर पर खड़ा था और बाकी बल्लेबाज आकर मुझे कहते हैं कि विनोद कोई परेशानी नहीं हम ये लक्ष्य हासिल कर लेंगे लेकिन खुद विकेट देकर चले जाते रहे.
कांबली ने कहा, ‘पता नहीं क्या गड़बड़घोटाला हो गया क्योंकि पहले दिन और दोपहर को भी फैसला कर लिया गया था कि हम (टॉस जीतने पर) पहले बल्लेबाजी करेंगे. हमारे बल्लेबाजों ने पैड भी पहन लिए थे लेकिन जब हमें पता चला कि क्षेत्ररक्षण लिया गया तो हमें काफी धक्का लगा. उन्होंने कहा मुझे बोलने का ही मौका नहीं दिया गया क्योंकि मुझे टीम से निकाल दिया गया. तब हमारे मैनेजर अजित वाडेकर को सब कुछ पता था. उन्होंने बाद में एक लेख लिखा था कि विनोद कांबली को बलि का बकरा बना दिया गया.कांबली ने कहा कि वह इसलिए रो रहे थे क्योंकि उनसे विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा बनने का मौका छीन लिया गया था.
कांबली ने कहा, मैं रोते-रोते ड्रेसिंग रूम में गया था. पूरी की पूरी टीम रो रही थी लेकिन मुझे पता नहीं कि किस के मगरमच्छ के आंसू थे और कौन वास्तव में रो रहा था. मैं बहुत दुखी था. जिस तरह से सचिन (तेंदुलकर) का सपना विश्व कप जीतने का था उसी तरह से मेरा और सभी खिलाड़ियों का भी था. मेरा वो सपना 1996 में अधूरा रह गया. श्रीलंका ने कोलकाता में खेले गये उस सेमीफाइनल मैच में पहले बल्लेबाजी का न्यौता मिलने पर आठ विकेट पर 251 रन बनाए. भारत के जब 120 रन पर आठ विकेट गिर गए तो दर्शकों ने हंगामा कर दिया जिसके बाद आगे का खेल नहीं हो पाया. आखिर में मैच रेफरी क्लाइव लायड ने श्रीलंका को इस मैच में ‘डिफाल्ट’ से विजेता घोषित कर दिया था.

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