उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्य के बंटवारे का प्रस्ताव ध्वानिमत से पारित हो गया है. अब इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजा जाएगा. इससे पहले जैसा की उम्मीद की जा रही थी, सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र की हंगामेदार शुरुआत हुई. समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने बसपा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया. उसके बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर समाजवादी पार्टी के विधायक हंगामा करने लगे जिसके बाद सदन की कार्यवाही 12.20 बजे तक स्थगित कर दी गई.
मायावती सदन में नहीं पहुंची जिसकी विपक्षी दलों ने आलोचना भी की. जब 12.20 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो मुख्यमंत्री मायावती सदन में उपस्थित हुईं. इसके बाद सदन में लेखानुदान प्रस्ताव पेश किया फिर राज्ये के बंटवारे का प्रस्ताव भी पेश किया गया जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. इसके बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई.
इसे एक तरह से मायावती की राजनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है. समाजवादी पार्टी ने बसपा सरकार पर अल्पमत में होने का आरोप लगाया था. दूसरी ओर बसपा से निष्काषित विधायक और असंतुष्ट विधायक भी पार्टी के लिए सिरदर्द बन सकते थे. अगर अविश्वास प्रस्ताव पर बहस और फिर वोटिंग होती तो मायावती सरकार मुश्किल में पड़ सकती थी. लकिन चूंकि सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गई है, तो माया के सर से ये मुसिबत भी फिलहाल टल गई लगती है. गौरतलब है कि देश के सबसे बड़े राज्य (आबादी के लिहाज से) उत्तर प्रदेश को बांट कर 4 अलग-अलग राज्य बनाने को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री मायावती ने एक प्रस्ताव रखा था. जो राज्य बनेंगे वो होंगे हरित प्रदेश, अवध प्रदेश, बुंदेलखंड और पूर्वांचल.

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