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फेसबुक ने चेतावनी दी है कि अगर उसके खिलाफ चल रहे कई महंगे मुक़दमे वह हार जाता है तो उसे मजबूरन फेसबुक को बंद करना पड़ सकता है। सोशल नेटवर्किंग साइट ने यह कड़ा संदेश संभावित निवेशकों के लिए तैयार दस्तावेज़ में शामिल किया है। गौरतलब है कि फेसबुक इस वसंत में 100 बिलियन डॉलर के साथ शेयर मार्केट में उतर रहा है।
फेसबुक ने कहा है कि याहू के कानूनी कार्रवाई सहित उसके खिलाफ चल रहे विभिन्न कानूनी कार्रवाई के कारण उसके व्यापार,वित्तीय स्थिति या आपरेशन के परिणाम पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। फेसबुक ने कहा कि इस तरह के निपटान या निर्णय के संदर्भ हमें कुछ या हमारे सभी ऑपरेशनों को बंद करने की जरुरत पड़ सकती है या अन्य पार्टी को पर्याप्त मात्रा में धन का भुगतान करना पड़ सकता है। लेकिन कम्पनी की चेतावनी को विश्लेषकों द्वारा निवेशकों के लिए और फेसबुक को अपने अतीत को कवर करने का एक रास्ता भर के तौर पर देखा जा रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक कम्पनी ऐसाकर सबसे खराब परिस्थिति की परिकल्पना कर रही है।
विश्लेषकों के इस अनुमान को कंपनी और अमेरिकी बैंकों का भी समर्थन हासिल होता दिखा रहा है जिन्होंने फेसबुक के ओवरड्राफ्ट की सीमा को 2.5 बिलियन डॉलर से बढ़ा कर 5 बिलियन कर दिया है। लेनदारों ने भी टैक्स कवर करने के लिए अपने 3 बिलियन के ब्रिजिंग लोन (ऋण पाटने के लिए) को बढ़ा दिया है। फेसबुक के 3000 कर्मचारी अपने शेयर विकल्प का इस्तेमाल कर कंपनी के 7.5 बिलियन मूल्य के शेयर खरीद सकते हैं। फेसबुक ने कहा :'हम ऐसा नहीं मानते हैं कि जिन मामलों का हम सामना हम कर रहे हैं,उसका अंतिम परिणाम प्रतिकूल पड़ेगा।'
फेसबुक ने इस चेतावनी को अमेरिका की वित्तीय निगरानी संस्था 'प्रतिभूति और विनिमय आयोग' के पास जमा दस्तावेजों में शामिल किया है। इन दस्तावेजों में दुनिया के सबसे लोकप्रिय सामाजिक नेटवर्किंग वेबसाइट ने खुलासा किया है कि कैसे वह मुकदमों का सामना कर रहा है और आगे भी इसका सामना करता रहेगा। इनमें महंगे और समय लेने वाले पेटेंट मुकदमें और दूसरे 'बौद्धिक संपदा अधिकार' जैसे मामले शामिल हैं।
फेसबुक ने इस चेतावनी को अमेरिका की वित्तीय निगरानी संस्था 'प्रतिभूति और विनिमय आयोग' के पास जमा दस्तावेजों में शामिल किया है। इन दस्तावेजों में दुनिया के सबसे लोकप्रिय सामाजिक नेटवर्किंग वेबसाइट ने खुलासा किया है कि कैसे वह मुकदमों का सामना कर रहा है और आगे भी इसका सामना करता रहेगा। इनमें महंगे और समय लेने वाले पेटेंट मुकदमें और दूसरे 'बौद्धिक संपदा अधिकार' जैसे मामले शामिल हैं।
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