आठ साल बाद रेल के किराए बढे. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 14 मार्च 2012

आठ साल बाद रेल के किराए बढे.


आठ साल बाद यात्री किरायों में बढ़ोत्तरी की घोषणा करते हुए रेलमंत्री ने कहा है कि वे साधारण दर्जे के यात्री किराए में दो पैसे प्रतिकिलोमीटर की वृद्धि कर रहे हैं.  स्लीपर क्लास में ये बढ़ोत्तरी पाँच पैसा प्रति किलोमीटर होगी जबकि एसी क्लास में ये बढ़ोत्तरी आठ पैसे से 30 पैसे प्रतिकिलोमीटर होगी.

वित्तीय संकट से जूझ रही भारतीय रेलवे का 81 वाँ बजट पेश करते हुए रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता रेल यात्रा को सुरक्षित करना है. उन्होंने कहा है कि वे चाहते हैं कि भारतीय रेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा व्यवस्था मुहैया करवाई जाए. इसके लिए उन्होंने कई घोषणाएँ की हैं जिनमें अगले पाँच साल में सभी लेवल क्रॉसिंग हटाना, स्वायत्त रेल सुरक्षा अधिकरण की स्थापना, रेलवे रिसर्च डवलपमेंट काउंसिल की स्थापना और रेल रोड ग्रेड सेपरेशन कॉर्पोरेशन शामिल है.

रेलमंत्री ने कहा है कि 160 प्रतिघंटे की रफ़्तार से यात्री ट्रेन चलाने की योजना है. इसकी वजह से दिल्ली से कोलकाता के बीच की दूरी तय करने में रेल को 17 की जगह 14 घंटे लगेंगे. उन्होंने घोषणा की है कि इंडियन रेलवे स्टेशन डवलपमेंट कॉर्पोरेशन की स्थापना की जाएगी. ये संस्था रेलवे स्टेशन को एयरपोर्ट की तरह विकसित करेगी. लक्ष्य है कि अगले पाँच वर्षों में 110 स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जाए.

दिनेश त्रिवेदी ने राज्य सरकारों से भी अनुरोध किया गया है कि वे भी हिस्सेदारी करें और बिना किसी लागत के ज़मीनें उपलब्ध करवाएँ जिससे कि शीघ्रता से नई लाइनों का निर्माण हो सके. उन्होंने घोषणा की है कि सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी से छत्तीसगढ़ में तीन नए रेल कॉरिडोर की स्थापना की जाएगी. इसके लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया जा चुका है.

आम लोगों के लिए यात्रा के अहम साधन रेलवे से यात्रियों को बहुत सी उम्मीदें हैं लेकिन महंगाई की वजह से लगातार अपनी लोकप्रियता खो रही सरकार पर दबाव है कि वह पिछले कई वर्षों की तरह ही इस बजट को लोकलुभावन बनाए रखे. यूपीए के प्रमुख घटक दलों में से एक तृणमूल कांग्रेस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह नहीं चाहती कि रेल बजट के रास्ते जनता पर बोझ डाला जाए. और ये संयोग भर नहीं है कि दिनेश त्रिवेदी तृणमूल कांग्रेस के ही सदस्य हैं और उन्होंने पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी की जगह पर ही रेलमंत्री का पद संभाला है.

रेलवे की हालत में सुधार के लिए दो समितियाँ गठित की गई थीं. संरक्षा को लेकर अनिल काकोदकर संमिति और आधुनिकीकरण को लेकर सैम पित्रोदा समिति. रेल मंत्री की सबसे बड़ी चुनौती इन दोनों समितियों की सिफ़ारिशों पर अमल की दिशा में क़दम उठाना और उसके लिए पैसे जुटाना होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए रेलवे को हर साल 45 हज़ार करोड़ रुपयों की ज़रुरत होगी.

तृणमूल कांग्रेस सहित यूपीए के बहुत से घटक दल नहीं चाहते कि आम लोगों पर यात्री किराए बढ़ाए जाएँ, ऐसे में रेल मंत्री के पास इसके अलावा कोई चारा नहीं बचता कि वे एसी श्रेणी के किराए में बढ़ोत्तरी करें. मालभाड़े में पिछले ही साल 22 फीसदी बढ़ाया गया था, ऐसे में ये भी एक चुनौती है कि वे माल भाड़े में वृद्धि को लेकर क्या फैसला करते हैं. आखिर मालभाड़े में बढ़ोत्तरी का असर तो महंगाई बढ़ने के रुप में ही होता है.

टिकटों की उपलब्धता, ऑनलाइन टिकटों की बिक्री, कालाबाज़ारी रोकने के क़दम और वेटिंग लिस्ट ख़त्म करने की कवायद भी खासी मशक्कत भरी है. पिछले रेल मंत्रियों ने नए रेल चलाने से लेकर कोच फ़ैक्ट्री लगाने तक बहुत सी घोषणाएं कर रखी हैं जिस पर अभी भी अमल होना शेष है. ऐसी स्थिति में नई घोषणाओं को लेकर रेल मंत्री क्या फैसला करते हैं, इस पर भी लोगों की नज़र होगी. 

1 टिप्पणी:

jadibutishop ने कहा…

sunder rachna ....
http://jadibutishop.blogspot.com