प्रथम यूथ एडवेंचर स्पोर्ट्स फेस्टिवल का रोमांच युवाओं के सिर चढ़ कर बोल रहा है। वे दुनिया की हर ऊंचाई छूने को बेताब दिख रहे हैं। शनिवार सुबह मोइनुल हक स्टेडियम में एवरेस्ट फाउंडेशन दल ने युवाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया, तो हर किसी की निगाहें पहाड़ की ऊंचाई पर टिकी थीं।
फाउंडेशन के वरीय सदस्य चंडी ठाकुर ने प्रतिभागियों को बताया गया कि पर्वतारोहण के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली रस्सी 2200 से 2600 किलोग्राम वजन उठा सकती है। इस कैराबिनर्स में रस्सी फंसाई जाती है। वह 10 हजार किलोग्राम का वजन संभाल सकती है। पर्वतारोहण के दौरान सीट हारनर, चेस्ट हारनर और रस्सी ही उनकी जीवन रक्षक होती हैं। इसके अलावा रिवर क्रॉसिंग का प्रशिक्षण भी दिया गया।
शुभ्रा, अपराजिता, प्राची, आयुषी मिश्र आदि ‘क्लाइम्बिंग ऑन’ की आवाज सुनते ही बड़ी सावधानी से 40 फीट की ऊंचाई छू कर नीचे उतरीं। रिवर क्रॉसिंग में शारीरिक संतुलन बनाकर जान बचाने का प्रशिक्षण भी युवाओं ने लिया। युवाओं को 40 फीट के कृत्रिम पहाड़ पर प्रशिक्षण दिया गया। माउंट क्लाइम्बिंग और माउंट रेपलिंग के साथ ही दुर्घटना से बचने के लिए बुनियादी चीजों का ध्यान रखने की ट्रेनिंग दी गई।
एवरेस्ट विजेता पद्मश्री संतोष यादव की देखरेख में एवरेस्ट फाउंडेशन के सदस्य बिहार के युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं। 14 सदस्यीय दल में सभी पर्वतारोही कुल्लु मनाली के रहनेवाले हैं। इनमें चंडी ठाकुर, गंगाराम शर्मा, गौतम ठाकुर और मंगल ठाकुर मुख्य ट्रेनर हैं।
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