परायों के दम पर न इतराएं, खुद को करें बुलंद
ये उनका आदमी है, ये अपना आदमी है, ये उनका ख़ास आदमी है, ये अपना ख़ास आदमी है। इसका मतलब ये कि आदमी में कोई दम नहीं है, वह बेजान बना हुआ है और परायों के दम पर दम भरता रहा है। जो जिसका आदमी है वह आका के नाम पर कुछ भी कर गुजरने को स्वच्छन्द है, ऐसा हो गया है। यहाँ कोई पूर्ण नहीं है, हर कोई दूसरे आदमी के बूते आदमी बना हुआ है। आदमी जैसे पशु बना हुआ है और उसके गले में आका का पट्टा बंध जाने पर वह कई मायनों में स्वतंत्र हो जाता है। उनका आदमी होने का मतलब ही यह है कि वह साण्ड हो गया है और चाहे जहाँ परिभ्रमण करते हुए वह कुछ भी कर लेने का स्वतंत्र है।
जैसे जमीन का पट्टा होता है, वैसे ही किसी का आदमी हो जाने का पट्टा लिखवा लेने की तरह वह आदमी के रूप में स्वतंत्र इकाई नहीं होता बल्कि किसी का आदमी होने की वजह से आदमी होता है। जो चुने हुए हैं उनके भी ढेरों आदमी हैं, जो चूना लगाने वाले हैं और नहीं चुने हुए हैं उनके भी अपने असंख्य आदमी हुआ करते हैं। जो जितना बड़ा आदमी है, उसके आदमियों की संख्या उतनी ही ज्यादा और व्यापक होती है। राम से बड़ा राम का नाम की तर्ज पर आदमियों की पॉवर उससे कहीं ज्यादा होती है जिसके वे आदमी कहे जाते हैं। ये आदमी वे सारे काम करने के आदी होते हैं जो आम आदमी नहीं कर पाता।
काम चाहें औरतों के हों, या आदमी के या फिर उभयलिंगियों के। जब कोई किसी का आदमी कहला दिया जाता है तभी से उसमें समाप्त होने लगते हैं वे पौरुषी हारमोन, जिनमें स्वाभिमान और पुरुषार्थ के बीज तत्व भरे रहते हैं। जिस भगवान ने आदमी को आदमी के रूप में पहचान स्थापित करने पृथ्वी पर भेजा है वह अपनी मूल पहचान खोने लगा है। मौका परस्ती और अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी कर गुजरने के मौजूदा दौर में कितने आदमी रह गए हैं जो अपनी प्रतिभा, मेहनत और खुद के जमीर के बूते आदमीयत को गौरव दे रहे हैं ? वरना आजकल तो आदमी कहे जाने वाले ऐसे लोग बहुत बड़ी संख्या में मिल जाते हैं जिनके बारे में कोई यह नहीं कहता कि ये वाकई आदमी है।
अधिकतर के बारे में यही सब सुनने को मिलता है कि इनसे जरा बच के रहियो.... डर के रहियो.....इन्हें खिलाते-पिलाते रहियो... ये उनका आदमी है। सीधा-साधा आम आदमी इसका सीधा सा मतलब यही निकालता है कि इन लोगों को उनका आदमी होने का वह आजीवन लाइसेंस हाथ लग गया है, जिसके बूते वे कहीं भी कुछ भी करने को उन्मुक्त एवं स्वतंत्र हैं। इस मामले में सब बेफिक्र हैं। जो आदमी हैं वे भी, तथा उनके आदमी भी।
उनका-अपना आदमी होने की यह श्रृंखला गांवों
---डॉ. दीपक आचार्य---
9413306077
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