उत्तर प्रदेश की निवर्तमान मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने मंगलवार को राज्यसभा के चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मायावती के साथ उनके पार्टी सहयोगी और राज्यसभा सदस्य मुनकाद अली ने भी नामांकन दाखिल किया। अली का मौजूदा कार्यकाल जल्द ही समाप्त होने वाला है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा की करारी हार के फौरन बाद मायावती के राज्यसभा में जाने की अटकलें लगने लगी थीं। उन्होंने पिछले तीन दिन के दौरान चुनाव नतीजों के कारणों की समीक्षा के साथ-साथ राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के मुद्दे पर भी अपने पार्टी सहयोगियों से विचार-विमर्श किया था।
बसपा के सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश के पूर्व कैबिनेट सचिव शशांक शेखर को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ पार्टी विधायकों तथा पदाधिकारियों की आपत्ति के बाद पार्टी ने कल रात मुनकाद अली को एक बार फिर राज्यसभा प्रत्याशी बनाने का फैसला किया था। मायावती इस वक्त प्रदेश विधान परिषद की सदस्य हैं और वह राज्यसभा में जाने के लिए राज्य विधानभवन के उच्च सदन की सदस्यता से त्यागपत्र देंगी।
मायावती ने नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) को बहुमत मिलते ही गुंडागर्दी तथा सर्वसमाज पर अत्याचार बढ़ गए हैं। ऐसे में पार्टी ने फैसला किया है कि इन मुद्दों को संसद में जोरदार तरीके से उठाया जाए। उन्होंने कहा कि मेरी पार्टी के लोग महसूस करते हैं कि चूंकि वे उत्तर प्रदेश में मेरे निर्देश पर काम करेंगे और सपा के कृत्यों को विधानसभा के अंदर और बाहर उठाएंगे। ऐसे में अगर मैं संसद में जाती हूं तो इन मुद्दों को वहां उठा सकती हूं।
मायावती ने कहा कि मेरी पार्टी के लोगों का कहना है कि मुझे ना सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में बसपा का जनाधार बढ़ाना चाहिये। उनका मानना है कि मुझे अपना पूरा समय सिर्फ उत्तर प्रदेश को समर्पित नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में दो साल बाद लोकसभा चुनाव होने हैं और अब वह उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश को समय देने के लिए स्वतंत्र हैं। निवर्तमान मुख्यमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत का भरोसा जताते हुए विश्वास दिलाया कि उनकी पार्टी भविष्य में अच्छे नतीजे देगी।
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