एनसीटीसी के गठन पर विरोध दर्ज कराते हुए 10 राज्यों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने बिना राज्यों की सहमति के एकतरफा फैसला किया है जो राज्यों के अधिकारों के हनन की तरह है. चिदंबरम ने कहा कि मंगलवार की बैठक में कुछ राज्यों ने एनसीटीसी के गठन पर समर्थन जताया और जिन राज्यों ने विरोध दर्ज कराया है वे भी इसके गठन के सिद्धांत पर सहमत हैं.
लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने एक अंग्रेजी दैनिक की खबर का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय गृह सचिव ने सोमवार की बैठक में राज्यों के डीजीपी और मुख्य सचिवों से कहा कि आप मुख्यमंत्रियों के स्टेनोग्राफर की तरह काम नहीं करें. उन्होंने कहा कि गृह सचिव का यह बयान आग में घी डालने जैसा है और इस बयान पर क्या सरकार गृह सचिव पर कोई कार्रवाई करेगी. चिदंबरम ने खबर को खारिज करते हुए कहा कि यह खबर केवल एक अखबार में आई है और मैंने मंगलवार सुबह गृह सचिव को बुलाकर उनसे इस बारे में पूछा लेकिन उन्होंने इस तरह की किसी टिप्पणी से स्पष्ट इंकार किया है.
संप्रग के सहयोगी दलों तृणमूल कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस ने भी एनसीटीसी पर विरोध दर्ज कराया है. तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने सदन में कहा कि केंद्र राज्यों के अधिकारों पर अतिक्रमण का प्रयास कर रही है और लोकपाल तथा लोकायुक्त विधेयक के मामले में भी ऐसा ही देखा गया था. उन्होंने कहा, इस तरह की योजना (एनसीटीसी) को तत्काल वापस लेना चाहिए.
.jpg)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें