कांग्रेस के नेताओं ने ही लगाया कांग्रेस को बट्टा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 18 मार्च 2012

कांग्रेस के नेताओं ने ही लगाया कांग्रेस को बट्टा


यदि सही रिपोर्ट देते तो नहीं मचता यह बवाल, कहीं पावर प्रोजेक्ट का खेल तो नहीं?

उत्तराखण्ड कांग्रेस में घमासान यूं ही नहीं मचा है। इसके लिए कुछ हद तक पार्टी के जिम्मेदार नेता भी जिम्मेदार हैं। जिन्होंने हालिया विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस सुप्रीमों सोनिया गांधी के सामने प्रदेश के नेताओं की सही स्थिति को नहीं रखा। इसे उनकी कमजोरी कहा जाए अथवा उन्होंने जानबूझकर किसी को फायदा व किसी को ठिकाने लगाने के लिए यह चाल चली है। इस बात की तस्दीक जहां एक ओर कांग्रेसी नेता हरीश रावत कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर पूर्व नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत ने भी अपने बयानों में की है। इनका साफ कहना था कि प्रदेश प्रभारी चौधरी विरेन्द्र सिंह और पर्यवेक्षक बनकर आए गुलाम नवी आजाद ने उनके साथ न्याय नहीं किया है। इतना ही नहीं कांग्रेसी नेताओं का तो यहां तक कहना है कि इन दोनों नेताओं ने कांग्रेस आलाकमान तक को मुगालते में रखा और विजय बहुगुणा के समर्थन में अपनी रिपोर्ट दी। 

कांग्रेस के कई नेताओं ने तो यहंा तक कहा कि विजय बहुगुणा और चौधरी विरेन्द्र सिंह के बीच कोई ट्रीटी हुई है। यही कारण है कि जब ये वरिष्ठ नेता उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री को लेकर विधायकों की नब्ज टटोल रहे थे, ऐसे समय पर मात्र विजय बहुगुणा ही चौधरी के साथ हर कदम पर साये की तरह चल रहे थे। नेताओं का कहना है कि जब विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल थे, तो उन्हें इस प्रक्रिया से दूर रहना चाहिए था, जैसे प्रदेश के अन्य चार सांसद। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन दोनों नेताओं के षडयंत्र का तब पता लगा जब कांग्रेस के युवा नेता व महासचिव राहुल गांधी ने एक रिपोर्ट सोनिया गांधी को सौंपी, जिस रिपोर्ट में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में हरीश रावत का नाम सबसे उपर था और इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा है कि हरीश रावत ने उत्तराखण्ड में कांग्रेस को पुर्नजीवित करने मे जो ताकत लगाई है। उसी का प्रतिफल है कि कांग्रेस सत्ता के करीब पहुंची लिहाजा यदि सांसदों में से मुख्यमंत्री का चयन किया जाना है तो हरीश रावत अन्य दावेदारों में सबसे आगे थे। इसी तरह इस रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि डा. हरक सिंह रावत, डा. इंदिरा हृदयेश पाठक तथा यशपाल आर्य विधायकों में से मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार हैं। इस रिपोर्ट में जहां हरक सिंह और यशपाल आर्य के कार्याें का विस्तार से विवरण दिया गया है और रिपोर्ट में इनका मुख्यमंत्री के लिए पक्ष लिया गया है तो वहीं डा. इंदिरा हृदयेश पाठक को मजबूत महिला नेत्री के साथ-साथ उनकी कुशल प्रशासनिक क्षमताओं का भी उल्लेख किया गया है। 

बहरहाल कांग्रेस के आलानेताओं की इसे भूल कहा जाए अथवा जानबूझकर किया गया कृत्य, लेकिन यह जरूर है कि कांग्रेस के नेताओं ने ही कांग्रेस को उत्तराखण्ड में कठघरे में खड़ा करने में कोई कोरकसर नहीं छोड़ी है। अब यह देखना है कि सोनिया गांधी ऐसे नेताओं जो कांग्रेस को ही गुमराह कर रहे हों के खिलाफ क्या कार्यवाही करती है, फिलहाल यह भविष्य के गर्भ में छुपा है लेकिन इतना तय है कि उत्तराखण्ड में कांग्रेस को इस लड़ाई के दौर में डालने वाले नेताओं के पर अवश्य कतर दिए जाऐंगे। 

वहीं यह भी जानकारी मिली है कि उत्तराखण्ड में विजय बहुगुणा अपनी सरकार बचाने और बनाने का हरसंभव दांव चल रहे हैं। जानकारों के अनुसार उन्हें उनकी इस मुहिम में एक बड़ी कॉर्पोंरेट का हरसंभव समर्थन प्राप्त है। जिस कंपनी में उनके पुत्र भी कार्यरत बताए जाते है। इस कंपनी को 10 जनपथ का करीबी भी माना जाता और यह भी बताया जाता है कि सोनिया और राहुल इसी कंपनी के निजी एयरक्राफ्ट से उडते हैं। यहंा यह भी जानकारी मिली है कि उत्तराखण्ड के प्रत्येक विधायक को समर्थन की एवज में 10 करोड़ का ऑफर हो चुका है। वहीं रावत ने अपने 18 समर्थक विधायकों को भूमिगत किया हुआ है। सूत्रों ने यह भी बताया कि रावत के यह भूमिगत विधायक गुडगांव के एक फॉर्म हाउस से उत्तराखण्ड की राजनैतिक हलचल पर नजर रखे हुए हैं। एक जानकारी के अनुसार रावत को पता है कि उत्तराखण्ड में सारा खेल पावर प्रोजेक्ट को लेकर है। यहंा 32 सौ करोड़ के नए पावर प्रोजेक्ट आने हैं। रावत इस पूरे प्रकरण में गुलाम नवी आजाद व चौधरी विरेन्द्र सिंह, अहमद पटेल की भूमिका से खासे नाराज बताए जा रहे हैं।। जिसने विधायकों की संख्या को लेकर सोनिया गांधी को गुमराह किया। बाद में भंवर जितेन्द्र सिंह की रिपोर्ट और राहुल गांधी को मिली रिपोर्ट में सारे मामले की पोल खुली। इस मामले में उत्तराखण्ड में कांग्रेस के सह प्रभारी अनीस अहमद भी अपने सहयोगी नेताओं से नाराज बताए जाते हैं कि उन्होंने आलाकमान को इस समूचे प्रकरण पर अंधेरे में रखा। एक जानकारी के अनुसार रावत ने अभी तक अपने सारे विकल्प खुले रखे हैं। 



(राजेन्द्र जोशी)

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