10 दिन में सब साफ हो जाएगा: हरक
रूद्रप्रयाग से कांग्रेस विधायक व पूर्व नेता प्रतिपक्ष डा. हरक सिंह रावत ने कहा कि 10 दिन में सब आपके सामने होगा। सदन पटल पर बहुगुणा सरकार द्वारा विश्वास मत हासिल किए जाने संबंधी सवाल के जवाब में उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि हरीश रावत से उनके राजनैतिक संबंध कोई मधुर नहीं है, लेकिन कांग्रेस के प्रति उनका समर्पण और उनके राजनैतिक जीवन को देखते हुए उनका मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पहला अधिकार था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2002 में हुए पहले चुनाव में उनको दरकिनार कर दिया गया, व इस समय भी उन्हें दरकिनार करते हुए राज्यवासियों की भावनाओं पर कुठाराघात है। उन्होंने कहा कि विजय बहुगुणा केंद्र में अच्छे नेता हो सकते हैं, लेकिन राज्य में काम करने वाले नेताओं को तरजीह दी जानी चाहिए।
स्पीकर चुनाव व मत विभाजन के दौरान पार्टी द्वारा व्हिप जारी किए जाने संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि व्हिप के डर से विधायकों को डराया नहीं जा सकता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब जनादेश ही खण्डित मिला है, तो ऐसे में स्थाई सरकार की उम्मीद करना ठीक नहीं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हरीश रावत को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर उन्हें कोई ऐतराज नहीं है क्योंकि उन्होंने सन 2002 के विधानसभा चुनाव में अपने बलबूते पर उन्होंने मृतप्राय कांग्रेस में जान फूंकने का काम किया था, लेकिन इसके बाद भी उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से दूर रखा गया। कमोबेश इस बार भी उनके साथ यही किया गया।
डा. हरक सिंह रावत ने भावुक होते हुए यह भी कहा कि पार्टी में कुछ नेताओं का काम केवल दरी बिछाने का होता है और वह जिंदगी भर दरी ही बिछाते रहते हैं, जिसमें मैं और हरीश रावत शामिल हैं। वहीं साथ में उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग राजयोग लेकर आते हैं और वे बिना कुछ किए उनको राजगद्दी सौंप दी जाती है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उनका मकसद मुख्यमंत्री की कुर्सी हथियाना नहीं बल्कि अपने समर्थकों और प्रदेश की सेवा करने का था, क्योंकि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहते हुए उनके समक्ष जितनी भी परेशानियां आई और जनता की जो आवाज उन तक पहुंची उनका उद्देश्य उनकी आवाज बनने का और उनकी समस्याओं के निराकरण का है। एक प्रश्न के प्रश्न का उत्तर देते हुए डा. रावत ने कहा कि हम पहाड़ी मूल के राजनेता पहाड़ों की जनसमस्याओं में उलझे रहते हैं। ऐसे में हो सकता है कि हमारी आवाज केंद्र तक नहीं पहुंच पाती है। यही कारण है कि तमाम महनतों की बाद भी हमें दरकिनार करते हुए उपर से नेता थोप दिया जाता है।
विधानसभा में बहुमत साबित किए जाने संबंधी सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब हम लोग एक महीने छह दिन चुनाव परिणाम का इंतजार कर सकते हैं तो आप लोग 10 दिन और इंतजार करिए विधानसभा पटल पर सब साफ हो जाएगा। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि यह चर्चा है कि विजय बहुगुणा के साथ 22 विधायक हो गए हैं, लेकिन सदन में बहुमत साबित करने के लिए 36 विधायकों की जरूरत पड़ती है। उन्होंने कहा कि वे जब राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं, ऐसे में मंत्री बनने का कोई औचित्य नहीं। उन्होंने कहा कि वे मंत्रीमण्डल में शामिल होने के बजाए साधारण विधायक के रूप में काम करना ज्यादा पसंद करेंगे।
(राजेन्द्र जोशी)

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