आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों का सम्मलेन. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 16 अप्रैल 2012

आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों का सम्मलेन.


प्रधानमंत्री ने राज्यों से आग्रह किया कि उन्हें केंद्र सरकार के साथ मिलकर इन चुनौतियों से लड़ना चाहिए। मनमोहन सिंह यहां आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों के वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर ये विचार व्यक्त किए। 

प्रधानमंत्री ने कहा, "वामपंथी उग्रवाद, धार्मिक कट्टरवाद ,जातीय हिंसा और आतंकवाद देश के सामने आंतरिक सुरक्षा की बड़ी चुनौतियां हैं.. मैं राज्यों से आग्रह करता हूं कि केंद्र के साथ मिलकर इन चुनौतियों से लड़ें।" सिंह ने कहा, "फरवरी 2011 से देश में आंतरिक सुरक्षा के हालात कुल मिलाकर संतोषजनक रहे हैं।" 2011 में वामपंथी उग्रवाद से सम्बंधित हालात 2010 से बेहतर थे, लेकिन इस दिशा में अभी बहुत कुछ करना बाकी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत कार्य योजना के तहत नक्सल प्रभावित सात राज्यों में जिलों की संख्या 60 से बढ़ाकर 78 कर दी गई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ देश के रक्षा उपाय को बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश भर में बढ़ रही अस्थिरता के मद्देनजर यह आवश्यक है। सिंह ने कहा, "आज आतंकवादी संगठन चालक और पहले से अधिक घातक हैं तथा सीमा पार उनका व्यवस्थित नेटवर्क है।"

गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने अपने सम्बोधन में वामपंथी उग्रवाद को देश के सामने सबसे दुर्जेय सुरक्षा चुनौती बताया। चिदम्बरम ने कहा कि पश्चिमी सेक्टर में देश की अंतर्राष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा घुसपैठ के लिहाज से कमजोर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती राज्य, जम्मू एवं कश्मीर में कानून-व्यवस्था में जाहिरतौर पर सुधार हुआ है। लेकिन प्रधानमंत्री ने इस बात पर चिंता जाहिर की कि पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में स्थिति अभी भी जटिल बनी हुई है।

प्रधानमन्त्री ने कहा, "आतंकवादियों द्वारा विकास सम्बंधी धन की लूट किए जाने के कारण क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर सुधारने की हमारी कोशिश प्रभावित हो रही हैं। तिराप और चांगलांग में विभिन्न आतंकवादी गुटों में टकराव असुरक्षा का एक दूसरा स्रोत है।" प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर में कई आतंकवादी और जातीय अलगाववादी गुटों के साथ जारी बातचीत और संवाद की राजनीतिक प्रक्रिया पर संतोष जाहिर किया। पुलिस के आधुनिकीकरण, तटीय सुरक्षा योजना और सीमा क्षेत्र विकास योजना पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने राज्यों से आग्रह किया कि देश को सुरक्षित बनाने के लिए कर्मियों की गुणवत्ता सुधारने हेतु अपने तरीके से काम करते हुए इन योजनाओं को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि यह चिंता की बात है कि आतंकी हमले के आरोपियों को लोग धर्म के आधार पर समर्थन के लिए आगे आ रहे हैं। यह गलत प्रचलन है। गौरतलब है कि दिल्ली में आज सभी सूबे के मुख्यमंत्रियों की बैठक आंतरिक सुरक्षा पर चल रही है। इसी में उन्होंने कहा कि साल 2011 में दो बड़े आतंकी हमले देश में हुए। मुंबई में सीरियल ब्लास्ट और दिल्ली में हाईकोर्ट में धमाका हुआ। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हालात शांत हैं। शांतिपूर्ण विकास के चलते कश्मीर में टूरिस्टों की संख्या बढ़ी है। सूबे में साल 2011 में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बाद उसके अच्छे परिणाम कश्मीर में देखने को मिल रहे हैं। चिदंबरम ने कहा कि साल 2011 में हिंसा की घटनाओं में कमी आई है। साथ ही उत्तर पूर्वी राज्यों में भी हिंसा की घटना में कमी आई है। उन्होंने कहा कि साल 2011 में 18 आतंकी मॉड्यूल को निष्प्रभावी किया गया है, जबकि साल 2012 में तीन ग्रुप को निष्प्रभावी किया गया है। चिदंबरम ने कहा कि एलओसी और अंतराष्ट्रीय सीमा आज भी असुरक्षित है। असम माओवादी गतिविधियों का नया अड्डा बन गया है। 


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