मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का सितारगंज से उपचुनाव लडऩा लगभग तय हो गया है। इसके पीछे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य की रणनीति कामयाब होती नजर आएगी। प्रदेश में मुख्यमंत्री के उपचुनाव को लेकर शुरू से ही संशय बरकरार था और मुख्यमंत्री के चुनाव को लेकर यही कयास लगाए जा रहे थे कि किसी विधायक से सीट खाली कराने के बाद कांग्रेस विधानसभा में अपनी संख्या कम करने का जोखिम नही उठाएगी। विरोधियो के निशानो पर शुरू से ही बने विजय बहुगुणा कोई भी रिस्क लेने के मूड में शरू से ही नही दिख रहे थे और एक रणनीति कें तहत भाजपा के विधायक को सीट खाली कराने के साथ साथ वहां की राजनैतिक जमीन मजबूत करने के लिए लगे हुए थे। उत्तराखण्ड में लोकसभा चुनाव से जीत का परचम रचने वाले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य लगातार तीसरी बार इतिहास दोहराने की तरफ बड़ते हुए नजर आ रहे हैं। उत्तराखण्ड में कांग्रेस की सरकार को सत्ता में लाने के साथ साथ राजनैतिक संतुलन बनाए रखने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका नजर आई है और उस समय यशपाल आर्य ने कांग्रेस के संकट मोचन बनने की भूमिका निभाई थी जिस समय मुख्यमंत्री पद को लेकर विजय बहुगुणा के खिलाफ केन्द्रीय मंत्री हरीश रावत, इन्दिरा हदयेश, हरक सिंह रावत खुलकर विरोध में खड़े हो गए थे उस समय यशपाल आर्य ने विजय बहुगुणा के साथ मिलकर कांग्रेस के भीतर संकट मोचन की भूमिका अदा की और अब अपने पुराने विधानसभा क्षेत्र सितारगंज से मुख्यमंत्री को उपचुनाव लड़वाकर विजयश्री का रास्ता तैयार करवाने के साथ साथ कांग्रेस हाइकमान को यह संदेश देना चाहते हैं कि गढ़वाल से रिश्ता रखने वाले मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा सितारगंज सीट से चुनाव लडक़र प्रदेश के जनप्रिय मुख्यमंत्रियो की श्रेणी में शुमार किए जाते हैं। सितारगंज से चुनाव लडऩे का एलान बीते दिवस प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने शक्तिफार्म आयोजित बंगाली समुदाय के सम्मेलन में किया और अंतिम फैसला कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी पर छोड़ा है।
हजारो की संख्या में मौजूद बंगाली समुदाय के साथ हर वर्ग का व्यक्ति इस सम्मेलन में जहां मौजूद था वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे एनडी तिवारी के समय में इस क्षेत्र में जितनी भीड़ एकत्र हो पाती थी वह कई वर्षाे के बाद मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान देखने को मिली। मुख्यमत्री ने स्वयं स्वीकार किया कि उत्त्राखण्ड के किसी भी विधानसभा में इतनी व्यापक भीड़ वह अपनी उपस्थिति में नही देख पाए है और जनता का फैसला वह कभी भी मानने से इनकार नही करेंगे। उत्त्राखण्ड में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जिस तरह से अपनी रणनीति को अंजाम देते जा रहे हैं उससे विरोधी खेते में खासी हलचल देखी जा रही है। चूंकि यशपाल आर्य का कद लोकसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस हाइकमान के सामने काफी उंचा हो चुका था और सत्ता में कांग्रेस की वापसी के बाद इस कद को और उंचा समझा जाने लगा। अब सितारगंज से मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को चुनाव जितवाकर यशपाल आर्य एक बार फिर यह साबित कर देंगे कि उत्तराखण्ड की राजनीति में वह मुख्यमंत्री को गढ़वाल के बजाए कुमाए से भी चुनाव जिताने का दम रखते हैं।
(राजेन्द्र जोशी)
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