इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता की परीक्षा का समय. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 4 जून 2012

इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता की परीक्षा का समय.


विश्व आर्थिक मंदी के बीच भारत के बदहाल आर्थिक हालात से सरकार सहित पूरा यूपीए चिंतित  है। यूपीए का पूरा कुनबा इस आर्थिक संकट से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है। प्रधानमंत्री ने इसके लिए सीनियर मंत्रियों की एक बैठक बुलाई है।

प्रधानमंत्री ने कहा है कि देश कठिन आर्थिक दौर से गुजर रहा है। यह हमारी इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता की परीक्षा का समय है। विपक्षी दलों और अन्ना-रामदेव का नाम लिए बिना प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा है कि हमारे विरोधी झूठी और असत्य बातें फैला रहे हैं। उन पर ध्यान देने की जरूरत नहीं। हमें पूरा विश्वास है कि हम इस मुश्किल दौर से बाहर निकल जाएंगे।

देश की खस्ता आर्थिक हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश की विकास दर पिछले तीन सालों में 9 फीसदी से घटकर 5.3 फीसदी पर पहुंच गई है। सरकार का राजकोषीय घाटा लगातार बढ़ रहा है। सब्सिडी का बोझ कई गुना बढ़ गया है। प्रधानमंत्री सीनियर मंत्रियों के साथ होने वाली बैठक में इकनॉमी की समीक्षा और दिक्कतों पर चर्चा करेंगे। गौरतलब है कि जीडीपी और आईआपी के कमजोर आंकड़ों के बाद सरकार के सभी हलकों में फिक्र का माहौल बन गया है।

ऐसा माना जा रहा है कि विकास को रफ्तार देने के लिए बैठक में कुछ कदम उठाए जाने के फैसले भी हो सकते हैं। पिछले हफ्ते ही इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को बढ़ावा देने के मकसद से प्रधानमंत्री ने कई ऐलान भी किए हैं। सोमवार को महंगाई के मोर्चे पर लड़ रहे आरबीआई ने भी ब्याज दरों में कटौती के संकेत दिए हैं। ऐसे में यह देखना है कि 1991 में भारत को आर्थिक संकट से बाहर निकालने वाले मनमोहन सिंह इस बार देश को इस संकट से निकाल पाते हैं कि नहीं। 

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