बाबा के आन्दोलन का पहला चरण आज ख़त्म - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 11 अगस्त 2012

बाबा के आन्दोलन का पहला चरण आज ख़त्म


आज बाबा रामदेव के अनशन का तीसरा दिन है हालांकि अभी तक सरकार ने रामदेव से बातचीत की कोई भी पहल नहीं की है। ऐसे में हो सकता है कि रामदेव आज अपनी नई रणनीति का खुलासा करें। वो इसके बारे में 12 अगस्त को बताने वाले थे। आंदोलन का दूसरा दिन लोगों को उम्मीद थी कि बाबा देशभर में घूम-घूम कर जिस तरह सरकार की नीतियों पर आक्रामक रुख अख्तियार करते रहे आंदोलन के दूसरे दिन कुछ वैसा नजर आ सकता है लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। 

आज आंदोलन का तीसरा दिन है। रामलीला मैदान में लोग देश-समाज और व्यवस्था में कुछ नीतिगत बदलाव का सपना लेकर जमा हुए हैं उनके इरादों में जोश और आक्रोश है लेकिन आंदोलन का मैदान योग शिविर और भजन-कीर्तन कर राधे-राधे का पैगाम देने वाली भूमि में बदलता दिखने लगा है। तो क्या रामदेव पहले आंदोलन की बुरी यादों को बिसरा नहीं पाए हैं?

बाबा रामदेव इस बार हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं और आंदोलन की रूपरेखा उन्होंने पहले से तैयार कर ली है। बाबा इस बार सरकार को पलटवार का कोई मौका नहीं देना चाहते। आंदोलन के तीसरे दिन यानी आज इसकी झलक मिल सकती है। आज आंदोलन का पहला चरण पूरा होने वाला है। बाबा ने तीन दिनों के अनशन के बाद 12 अगस्त को आंदोलन के अगले चरण का खुलासा करने का ऐलान किया था लेकिन बहुत मुमकिन है कि बाबा आज ही आंदोलन की अगली रणनीति का खुलासा कर दें।

सूत्रों के अनुसार बाबा अगले चरण में फिर तीन दिन के अनशन का ऐलान कर सकते हैं। इस दौरान वो दोनों तरफ से थोड़ी नरमी की नीति पर काम करने के मूड में हैं। लेकिन ऐसा नहीं होने पर बाबा 14 अगस्त को बड़ा ऐलान कर सकते हैं। इसके तहत 15 अगस्त से सरकार के खिलाफ हल्ला बोल का ऐलान हो सकता है।15 अगस्त को जिस वक्त प्रधानमंत्री लाल किले पर तिरंगा फहरा रहे होंगे उसी वक्त बाबा रामदेव देश से दूसरे स्वतंत्रता संग्राम में कूदने की अपील कर सकते हैं। सरकार अब तक रामदेव के आंदोलन को न तो गंभीरता से लेती दिख रही है और न ही भाव देने के मूड में है। लेकिन जैसे-जैसे वक्त बीतेगा, इसे सरकार की तानाशाही के रूप में देखने और बताने का सिलसिला शुरू होगा।

माना जा रहा है कि तब रामदेव का अब तक के लचीले रुख को हथियार के रूप में पेश किया जा सकता है। यानी, योग गुरु की नरमी भी सुनियोजित रणनीति का ही हिस्सा है। धीरे-धीरे रामदेव और उनके आंदोलन की असली तस्वीर नजर आने वाली है। इस लिहाज से शनिवार और रविवार का दिन बेहद अहम साबित हो सकता है।

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