कोयला ब्लॉक आवंटन मामले की जांच कर रही अंतरमंत्रालीय समूह (आईएमजी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार निजी कंपनियों के कोल ब्लॉक आवंटन रद करने की सिफारिश की है। कोयला मंत्रालय ने भी बिना किसी देरी की समूह की सिफारिशें मान ली हैं। इसके साथ ही तीन कंपनियों की बैंक गारंटी जब्त करने की भी सिफारिश की गई है। इनमें जिंदल परिवार से जुड़ी कंपनी मॉनेट इस्पात और वीरांगना इस्पात कंपनी शामिल हैं।
सरकार को नाकों चने चबाने वाले इस मामले में इसे पहली बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले सीबीआइ ने भी छह कंपनियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने की बात कही थी।
वित्त मंत्री पी चिदंबरम और कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल की बैठक के बाद इस संबंध में निर्देश जारी किया गया। यह बैठक कोयला और आर्थिक मामलों के सचिवों की मौजूदगी में हुई। वित्त मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव द्वारा कोयला मंत्रालय को लिखे गए पत्र के आधार पर दोनों मंत्रालयों के बीच मतभेद के संबंध में मीडिया में आई खबरों को खारिज करते हुए वित्त मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि यह पत्र नियमित प्रशासनिक मामले से जुड़ा था। इस पत्र में आईएमजी के अध्यक्ष से हर मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और तथ्य आईएमजी के सभी सदस्यों को सौंपने के लिए कहा गया था जिसके बगैर वह कोई फैसला करने की स्थिति में नहीं होगा न ही कोई सिफारिश की जा सकती है।
वित्त मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा, वित्त मंत्रालय द्वारा जारी पत्र नियमित प्रशासनिक मामले से जुड़ा था जिसमें आईएमजी के अध्यक्ष से हर मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और तथ्य हर सदस्य को मुहैया कराने के लिए कहा गया था। इसमें कहा गया कि इस पत्र के बाद कोयला मंत्रालय ने अपने सभी सदस्यों को पूरी जानकारी मुहैया कराई। अतिरिक्त कोयला सचिव जोहरा चटर्जी के नेतृत्व में आईएमजी को वर्ष 2005-2009 के बीच निजी और सार्वजनिक कंपनियों को आवंटित 58 कोयला ब्लॉक के विकास के काम में हुई प्रगति की समीक्षा की जिम्मेदारी दी गई है।
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