डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और एलपीजी सिलेंडर का कोटा फिक्स करने के बाद सरकार ने आर्थिक सुधारों की दिशा में दूसरा कड़ा कदम बढ़ा दिया है। मल्टीब्रांड रिटेल में सरकार ने 51 फीसदी विदेशी निवेश(एफडीआई) को मंजूरी दे दी है। आज हुई सीसीपीए की बैठक में सरकार ने चार सार्वजनिक कंपनियों में विनिवेश को भी मंजूरी दे दी।
शुक्रवार को आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने मल्टी ब्रैंड रीटेल सेक्टर में एफडीआई को मंजूरी देने का ऐलान किया। सरकार ने सिंगल ब्रैंड रीटेल में 100 फीसदी एफडीआई को भी हरी झंडी दे दी है। कमिटी ने केबल और डीटीएच सेक्टर में भी एफडीआई बढ़ाने पर सहमति दे दी है। जानकारों का मानना है कि सरकार के इस फैसले से रीटेल सेक्टर का चेहरा बदल जाएगा और इससे महंगाई पर काबू पाया जा सकेगा।
सबसे अहम बात यह है कि सरकार के इस फैसले को संसद से पास कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यूपीए के सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। इसी बीच प्रधानमंत्री ने कहा है कि सुधारों का वक्त आ गया है और अब उनके सामने करो या मरो की स्थिति है।
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