25000 अनुसूचित जाति परिवार केरल में हैं बेघर - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 10 नवंबर 2012

25000 अनुसूचित जाति परिवार केरल में हैं बेघर


साक्षरता में अग्रणी राज्य केरल में अनुसूचित जातियों पर कराए गए एक सर्वेक्षण से खुलासा हुआ है कि 5.58 लाख परिवारों में से 25,408 के पास न तो उनके अपने घर हैं और न ही जमीन।  राज्य में अनुसूचित जातियों की समूची आबादी में 12.03 लाख महिलाएं हैं और 11.49 पुरुष हैं। यह सर्वेक्षण राज्य सरकार द्वारा संचालित केरल इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने नोडल एजेंसी के रूप में कराया है। सर्वेक्षण कार्य ग्रामीण विकास मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव एस.एम. विजयानंद के मार्गदर्शन में नोडल एजेंसी से सम्बद्ध के. सुकुमारन और उनकी टीम ने किया।

सर्वेक्षण विस्तृत क्षेत्र में किया गया जिसमें दो वर्ष लगे। रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि 15,984 परिवारों के नाम से जमीन तो है लेकिन उनके अपने घर नहीं हैं। इनके रहन-सहन की स्थिति पर गौर करने से पता चला कि 1.72 लाख परिवारों के पास एक कमरे का घर है, जबकि 3.72 परिवारों के पास एक से अधिक कमरों वाला घर है। अनुसूचित जातियों का आयु वर्ग की दृष्टि से अध्ययन करने से पता चला कि 13.60 लाख लोग 22 से 59 वर्ष उम्र के हैं, जबकि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या 2.35 लाख है। राज्य के 2,262 गांवों में बिजली का उपयोग किया जाता है, जबकि 0.88 लाख घरों में बिजली नहीं है।

जहां तक स्वच्छता की बात है, 68,685 घरों में बाथरूम नहीं है, जबकि 62,645 घरों में बाथरूम हैं लेकिन उनका उपयोग नहीं किया जाता। अनुसूचित जाति के 943 परिवार सार्वजनिक शौचालयों पर निर्भर हैं और केवल 2.59 लाख परिवारों को पेयजल उपलब्ध है। सर्वेक्षण से पता चला है कि 15 से 59 वर्ष उम्र वर्ग के लोगों को रोजगार प्राप्त है। केवल 8.30 लाख लोग कार्यरत हैं और 0.51 लाख लोगों के पास स्थायी नौकरी है।

कुमार स्वयं अनुसूचित जाति से आते हैं। उन्होंने कहा, "इस समुदाय के लिए एक लाख से अधिक बाथरूम बनाए जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक को हम 25,000 रुपये मुहैया कराएंगे। हम उम्मीद करते हैं कि यह सरकार हमारे सपनों को साकार करेगी।"

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