बिहार के बाद अब झारखण्ड में भी कांग्रेस को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने राज्य को विशेष दर्जा दिए जाने की मांग की है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चार नवम्बर को राज्य को विशेष दर्जा देने की मांग को लेकर पटना में 'अधिकार रैली' का आयोजन किया था। विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. सिंह ने कहा, "झारखण्ड में प्राकृतिक संसाधन भरपूर हैं लेकिन लोग गरीब हैं। राज्य के संसाधनों का प्रयोग अन्य राज्यों द्वारा अपनी सम्पन्नता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। झारखण्ड विशेष दर्जा दिए जाने के योग्य है।"
सहकारिता मंत्री एवं झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता हाजी हुसैन अंसारी ने कहा, "झारखण्ड पिछड़ा राज्य है और केंद्र सरकार को स्वत: राज्य को विशेष दर्जा दे देना चाहिए।" जबकि कांग्रेस ने कहा कि विशेष राज्य के मुद्दे पर राजनीतिक करने के बजाय राज्य सरकार को विकास पर ध्यान देना चाहिए।
कांग्रेस की राज्य इकाई के प्रवक्ता शैलेंद्र सिन्हा ने कहा, "भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली राज्य सरकार विभिन्न मदों के लिए मिले केंद्र एवं राज्य के धन को खर्च करने में विफल रही है। मुंडा सरकार इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है। उसे पहले अपने तंत्र को मजबूत करना चाहिए ताकि यह धन खर्च हो सके।"
मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कई अवसरों पर राज्य को विशेष दर्जा दिए जाने की मांग की है। इस वर्ष राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में मुंडा ने राज्य के विभिन्न मानव विकास सूचकांकों में सुधार एवं आधारभूत संरचना के विकास के लिए विशेष पैकेज की मांग की थी।
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