आईआईटी की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के लिए चर्चित पटना के सुपर 30 संस्थान के संस्थापक आनंद कुमार ने आईआईटी के अंडर ग्रैजुएट प्रोग्राम में ट्यूशन फीस सलाना 50 हजार से बढ़ाकर 90 हजार रुपये किए जाने की सिफारिश का जोरदार ढंग से विरोध किया है। आनंद ने कहा कि यह वृद्धि वैसे छात्रों के साथ मजाक है जो गरीबी में पढ़कर किसी तरह आईआईटी में सफलता प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार राज्य इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। यहां करीब 60 से 70 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करते हैं। इनके बच्चे किसी तरह बैकों से ऋण लेकर शिक्षा ग्रहण करते हैं, जबकि छात्रों को ऋण उपलब्ध कराने में यहां बैंकों का भी रिकार्ड खराब रहा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी लोक कल्याणकारी राज्य में शिक्षा सुलभ और सस्ती होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आईआईटी की शुल्क संरचना केवल कुछ निजी संस्थाओं को देखकर तय नहीं की जानी चाहिए। आनंद ने कहा कि यह निजी संस्थाओं का निजी मकसद हो सकता है, लेकिन सरकार को केवल लाभ के बिंदु से ही इसे नहीं देखना चाहिए। शिक्षा भविष्य के लिए आवश्यक है।
उल्लेखनीय है कि आईआईटी की एक समिति ने ट्यूशन फीस सलाना 50 हजार से बढ़कार 90 हजार रुपये करने की सिफारिश की है। वैसे काउंसिल की स्थायी समिति ने अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग जैसे समाज के कमजोर वर्ग के छात्रों पर बढ़ी फीस का भार नहीं डालने का निर्णय लिया है।
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