दिनेश मुनि को ‘साहित्य श्री’ की उपाधि - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

दिनेश मुनि को ‘साहित्य श्री’ की उपाधि

श्री दिनेश मुनि

श्रमण संघीय सलाहकार श्री दिनेश मुनि जी को अखिल भारतीय हिन्दी सेवी संस्थान, इलाहाबाद की ओर से सन् 2012 का ‘साहित्य श्री’ अलंकरण प्रदान किया गया है। उपाध्याय श्री पुष्कर मुनि जी एवं आचार्य श्री देवेन्द्र मुनि जी के अन्तेवासी शिष्य श्री दिनेश मुनि जी प्रथम जैन सन्त हैं, जिन्हें यह मानद उपाधि प्रदान की गई है। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार शर्मा के अनुसार श्री दिनेश मुनि जी की विगत वर्षों की सम्पादित-क्रियान्वित विशिष्ट सेवाओं और उपलब्धियों के आधार पर ‘साहित्य श्री’ अलंकरण से सम्मानित किया गया है। प्रशस्ति पत्र्ा उदयपुर में लोककलाविद् डॉ. महेन्द्र भानावत, प्राकृत भाषा एवं साहित्य्ा अध्य्ोता डॉ. उदय्ाचंद जैन, जैन विद्या व प्राकृत विभाग के पूर्व आचायर््ा हुक्मीचंद जैन, एडवोकेट रोषनलाल जैन, वीरेन्द्र डांगी ने दिनेश मुनि को भेंट किय्ाा।

आचार्य श्री देवेन्द्र मुनि जी के विशाल स्मृति-ग्रन्थ ‘अमृत-पुरुष’ सहित दो दर्जन से अधिक पुस्तकों और ग्रन्थों का लेखन/सम्पादन/संयोजन करने वाले श्री दिनेश मुनि जी को सन् 2007 के रोपड़ (पंजाब) वर्षावास के दौरान पंजाब सरकार ने ‘राजकीय अतिथि’ का सम्मान प्रदान किया था। सम्प्रति उनकी प्रेरणा से आचार्य श्री देवेन्द्र मुनि जी और उपाध्याय श्री पुष्कर मुनि जी के अप्रकाशित साहित्य का प्रकाशन और अनुपलब्ध साहित्य का पुनर्प्रकाशन हो रहा है। आचार्य श्री देवेन्द्र मुनि जी के आकस्मिक देवलोकगमन के पश्चात् उनकी पावन स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए उदयपुर में निर्मित बहुउद्देश्यीय देवेन्द्र धाम उन्हीं की सत्प्रेरणा का मूर्त रूप है। 

माता श्रीमती प्यारी बाई के प्यारे तथा पिता श्री रतन लाल जी मोदी के रतन श्री दिनेश मुनि जी का जन्म 22 मई 1960 को उदयपुर जिले के देवास में हुआ। तेरह वर्ष की बाल्यावस्था में जैन दिवाकर जयन्ती कार्तिक सुदी तेरस (8 नवम्बर 1973) को अजमेर में उपाध्याय श्री पुष्कर मुनि जी और आचार्य श्री देवेन्द्र मुनि जी के सान्निध्य में उन्होंने जैन आर्हती दीक्षा अंगीकार की। बाल-युवा पीढ़ी में संस्कार-सृजन के लिए श्री दिनेश मुनि जी तथा उनके सहयोगी गुरुभ्राता डॉ. द्वीपेन्द्र मुनि जी एवं डॉ. पुष्पेन्द्र मुनि जी ने उल्लेखनीय कार्य किये हैं। 



कोई टिप्पणी नहीं: