केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सूचना का अधिकार अधिनियम में संशोधन करने वाला विवादास्पद प्रारूप गुरुवार को वापस लेने का फैसला किया। इस मसौदे में कहा गया था कि सिर्फ सामाजिक और विकास से जुड़े मुद्दों पर मांगी गई जानकारी के लिए ही फाइल में लिखी गई टिप्पणियों का खुलासा किया जाएगा।
मंत्रिमंडल के फैसले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा, निजता और पेशेवर हितों की रक्षा के मामलों को छोड़ कर अन्य से जुड़ी फाइलों की टिप्पणियों का खुलासा किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में हुए विचारविमर्श के जानकार एक सूत्र ने बताया मंत्रिमंडल ने संशोधनों को वापस लेने का फैसला किया है।
वर्ष 2006 में मंत्रिमंडल ने संशोधनों को मंजूरी दी थी, लेकिन कड़े विरोध की वजह से इन्हें संसद में पेश नहीं किया जा सका।
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