तभी हो पाएगा भविष्य सुनहरा !!!
भूत, भविष्य और वर्तमान पर टिका हुआ है आज का आदमी और आदमी की दुनिया। आम आदमी से लेकर ख़ास तक की जिन्दगी में भूत का प्रभाव इतना अधिक होता है कि यह वर्तमान और भविष्य की बुनियाद तय करता है और यही नींव हर आदमी के जीवन की दशा और दिशा तय करने में मददगार होती है। भूतकाल सीखने और संवरने की शिक्षा देता है और उसे उसी रूप में लेना चाहिए। भूत में जो कुछ हो गया है उसमें से सकारात्मक और सारभूत उपयोगी बातों को जीवन में अंगीकार करते हुए जो लोग वर्तमान को संवार लेते हैं उनके लिए भविष्य अपने आप सुनहरा होने लगता है।
लेकिन सभी लोग ऎसा कर नहीं पाते। अधिकांश लोगों के जेहन में भूत की कालिख और नकारात्मक बातों का भण्डार जमा रहता है और ऎसे में उनके वर्तमान की किसी भी क्रिया का मौका हो या कुछ नया करना हो, तब ऎसे लोग भूत की ओर झांकने लगते हैं और तब इन लोगों को अधिकतर वे बातें ही ज्यादा याद आने लगती हैं जिन्होंने उन्हें पीड़ा पहुंचायी हो अथवा किसी न किसी रूप में दुःखी किया हो। वर्तमान को ढंग से जीने और मस्ती के साथ दिन गुजारने के लिए यह जरूरी है कि भूतकाल के अच्छे और सकारात्मक अनुभवों को ही याद रखा जाए न कि नकारात्मक बातों को। वर्तमान को संवारने के लिए यह जरूरी है कि हमारे अवचेतन से वे सारी बातें बाहर निकल जाएं जिनकी वजह से भूतकाल में तनावों का जन्म हुआ था।
इसके साथ ही वर्तमान को उच्चतम क्षमताओं की ओर ले जाएं, भूतकाल की किसी उपलब्धि से अपने व्यक्तित्व को सीमित दायरे मेें बांध कर न रखें। भूत के दायरों में बंधे रहकर वर्तमान को रिकार्ड उपलब्धि वाला कभी नहीं बनाया जा सकता है। इसलिए जीवन में जहां कोई मौका प्राप्त हो वहां भूत की सीमाओं से आगे बढ़कर सोचें, उच्च से उच्चतर और उच्चतम की ओर डग बढ़ाएं और भूतकाल के अनुभवों को और अधिक समृद्ध बनाएं, तभी वर्तमान को भूत से भी अधिक उपलब्धि वाला बनाया जा सकता है और इसी से वर्तमान का सुकून प्राप्त होता है जो कि इन्द्रधनुषी भविष्य को आकार देता है।
भूुत का आश्रय पाने का सीधा सा अर्थ है कि आदमी की गति थम गई है और उसमें भूत को भुनाने के अलावा कुछ भी सामथ्र्य नहीं बचा है। ढेरों लोग ऎसे मिल जाएंगे जिनका वर्तमान किसी भी दृष्टि से उल्लेखनीय नहीं है लेकिन भूतकाल के पदों, उपलब्धियों और किसी एकाध खास गतिविधि के सहारे वर्तमान को अपने हक में करने के लिए हमेशा भूत को भुनाते रहते हैं। ऎसे भूत हमारे अपने इलाकों से लेकर उन सभी स्थानों पर हैं जहां आदमी की पहचान उसके खुद के व्यक्तित्व की बजाय पद-प्रतिष्ठा से होती है। जहां-जहां भी आदमी की गंध आदमीयत की बजाय भूतकालीन पदों से होती है वहां उसका वर्तमान नीरस हो जाता है और भविष्य की बात तो भगवान भरोसे ही रहती है।
खूब सारे लोग ऎसे होते हैं जो अपने वर्तमान को भुलाकर जीवन में अंतिम क्षण तक भूत ही भूत के सहारे जिन्दा रहने और लोकप्रिय बने रहने की कोशिश में लगे रहते हैं। जो वर्तमान को भुला देते हैं और भूत के सहारे अपनी शखि़्सयत तथा अस्मिता को बरकरार रखने में पूरी जिन्दगी लगा देते हैं वे मनुष्य के रूप में कभी सफल नहीं हो पाते हैं और भूत ही भूत बने हुए खुद भी एक दिन भूत हो जाते हैं। ऎसे लोगों के कई आने वाले जन्मों तक में भी सुकून की परिकल्पना करना व्यर्थ है। आज भी हम ऎसे ढेरों लोग देखते हैं जो वर्तमान में कुछ भी नहीं हैं मगर भूत को सामने रखकर वर्तमान से प्रतिष्ठा चाहते हैं। ऎसे लोग आमजन से अपने आप दूर हो जाते हैं और अपना सम्मान निरन्तर खोते चले जाते हैं। भूत की सड़ी हुई ब्रैड़ से स्वाद लेने वाले इन लोगों को न स्वाद मिलता है, न कोई सुकून।
आम लोग ऎसे आदमियों को संसार और अपने क्षेत्र या समुदाय के लिए सिर्फ भारस्वरूप ही मानते हैं। जबकि बहुत से बिरले लोग ऎसे हैं जिनके पास भूतकालीन अनुभवों की कोई कमी नहीं होती लेकिन उनमें सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि उनकी आंखें और मस्तिष्क आगे ही आगे सोचने का सामथ्र्य रखते हैं और ऎसे लोग कभी भी भूत के सहारे अपने आपको वर्तमान साबित नहीं करते, बल्कि वर्तमान को भी पूरे जीवट के साथ जीते हैं और भविष्य को संवारने के लिए वर्तमान का पूरा-पूरा उपयोग करने का कौशल इनमें होता है। इसी वजह से इन्हें अनचाहे ही आदर, सम्मान और श्रद्धा के साथ लोकप्रियता प्राप्त होती रहती है। इसलिए जीवन में वर्तमान को संवारना चाहें तो भूत को भूल जाएं और उन कर्मों पर ध्यान दें जो वर्तमान में करणीय हैं। वर्तमान के इन कर्मों के सहारे ही भविष्य को सुनहरा आकार दिया जा सकता है। भूत के सहारे जीने वाले लोगों का वर्तमान और भविष्य दोनों बरबाद होते हैं।
---डॉ. दीपक आचार्य---
9413306077
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें