आपदा प्रबंधन की राशि फाइलों में खर्च
स्थानीय नगर परिषद क्षेत्र में कड़ाके की ठंढ और शीत लहर से नगरीय जीवन ठप्प सा हो गया है। गरीबों की हालत दयनीय हो गयी हैं राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा ठंढ से बचाव के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध कराये जाने के बावजूद नगर के विभिन्न चैक चैराहों पर रिक्शा चालक, मुसाफिर समेत अन्य लाचारों को आग की गरमी का मिलना मुहाल हो गया हैं। यदि रिक्शा चालक, पोलदार और अन्य मजदूर घरों में दुबके तो खाने के लाले पड़ जाएंगे। मजबूरन उन्हें काम करना पड़ रहा है, कांग्रेस के जिला सचिव और जनलीडर महम्मद रफी ने एक बार फिर से गले मे तख्ती लटकाकर जन-जन को संदेश दिया है कि सरकार का काम सिर्फ फाइलों में सिमट कर रह गया है। गरीबों की हित की बात करना सिर्फ दिखावा है, आपदा प्रबंधन तथा विकास के नाम पर राशि का आवंटन कर सरकारी खजाने को लूटने का काम सरकार कर रही है । युवा कांग्रेस के पूर्व विधान सभा अध्यक्ष श्रीकान्त कुमार, शमीम गुलरेज और जिला कमिटी के महम्मद हसनैन ने राज्य सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि गरीबो की हकमारी करने वाली बिहार सरकार शीतलहर जैसी आपदा में अलाव की व्यवस्था नहीं कर सकती तो इन्सानियत के नाते और क्या करने का दावा करती है।
उर्दू को रोजगार से जोड़ने की मांग
शहर की बहुत पुरानी अदबी संस्था “बज्म ए कहकशाँ“ की एक बैठक शिवगंज स्थित डाॅ. नौशाद के निवास में सम्पन्न हुई। संस्था के सचिव जफर कासिमी ने अपने प्रतिवेदन मंे उर्दू की सुरक्षा और विकास के लिए आन्दोलन चलाने का ऐलान किया । उन्होने कहा कि रेलवे स्टेशन, प्रखण्ड कार्यालय, शिकारपुर थाना में गलत उर्दू शब्दों का उपयोग किया गया है, जबकि अंचल कार्यालय के बोर्ड पर उर्दू लिखा ही नही गया है। श्री कासमी ने प्रशासन को आडे़ हाथों लेते हुए कहा कि राज्य की दूसरी राजभाषा है। इसलिए हिन्दी के साथ अंचल कार्यालय का नाम अनुमण्डल पदाधिकारी द्वारा अविलम्ब अंकित कराया जाना चाहिए। म. दिलशाद ने उर्दू प्रेमियो से इसे कामयाब बनाने की अपील करते हुए, रोजगार से जोड़ने की अपील की। बैठक में डाॅ. आफताब आलम खाँ, डाॅ. मो. फैसल सिद्धिकी, डाॅ. एस अहमद, डाॅ. अंजारूल हक, अफरोज आलम, मौलाना मुस्तफा कमाल, देवदत्त, ज्वाला भारती शामिल हुए।
(अवधेश कुमार शर्मा)
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