दिल्ली गैंग रेप केस के छह में से पांच आरोपियों को आज साकेत मेट्रोपॉलिटन कोर्ट में पेश किए जाने से पहले हंगामा हो गया। इस बीच, कोर्ट ने फैसला दिया है कि इस केस की सुनवाई बंद कमरे में होगी और अदालती कार्यवाही की विडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की रिपोर्टिंग को लेकर मीडिया पर रोक लगा दी है। आरोपियों की साकेत कोर्ट में पेशी के दौरान उस वक्त हंगामा हो गया जब दो वकील उनका केस लड़ने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद कई वकील भड़क गए और उन्होंने हंगामा मचा दिया। गौरतलब है कि साकेत बार असोसिएशन के सदस्यों ने फैसला किया था कि कोई भी वकील आरोपियों का केस नहीं लड़ेगा।
वकील मोहन लाल शर्मा ने अदालत में पेश होकर मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट नम्रता अग्रवाल से कहा कि उन्हें कुछ आरोपियों के रिश्तेदारों की ओर से उनकी पैरवी के लिए फोन आया था। उन्होंने कहा कि वह तिहाड़ जेल नहीं जा पाने के कारण वकालतनामे पर आरोपियों के हस्ताक्षर नहीं ले पाए। शर्मा ने मैजिस्ट्रेट से कोर्ट में आरोपियों के हस्ताक्षर लेने की अनुमति देने का आग्रह किया।
मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट ने उन्हें इस बात की अनुमति नहीं दी और कहा कि वह इस काम के लिए तिहाड़ जेल जाएं। अदालत द्वारा शर्मा का आग्रह खारिज किए जाने के साथ ही दो अन्य वकीलों ने मुकदमे में मदद के लिए अदालत मित्र के रूप में अपनी सेवाएं देने का आग्रह किया। इस दौरान मीडिया कर्मियों, वकीलों और पुलिसकर्मियों से खचाखच भरे कोर्ट रूम में जगह की कमी की वजह से पांच आरोपियों राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर को पेश नहीं किया जा सका।
दिल्ली पुलिस ने साफ किया है कि वह आरोपियों के सरकारी गवाह बनने की अर्जी का विरोध करेगी। दिल्ली पुलिस के कमिश्नर नीरज कुमार ने बताया, 'हमारे पास पूरे मजबूत सबूत हैं, गैंग रेप की शिकार युवती और और उसके फ्रेंड के बयान हैं, मेडिकल रिपोर्ट, डीएनए रिपोर्ट, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य रिपोर्ट्स, सब ही मजबूत केस के लिहाज से काफी हैं, इसलिए हमें दो आरोपियों को गवाह बनवाने की जरूरत नहीं है, वे खौफनाक-क्रूरतम वारदात के बराबर के जिम्मेदार हैं, हमने उनकी फांसी की इच्छा रखते है, गवाही की नहीं, हम उनके गवाह बनने की कोशिशों का विरोध करेंगे।'
नीरज कुमार ने कहा, 'आरोपी पवन गुप्ता और विनय शर्मा की सरकारी गवाह बनने की ऐप्लिकेशन का विरोध कराया जाएगा। दोनों ही बराबर के जिम्मेदार हैं। उनकी ऐप्लिकेशन का हमारे लिए कोई मतलब नहीं है।' गौरतलब है कि पवन और विनय ने रविवार को साकेत में मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट (एमएम) के सामने दरख्वास्त की थी कि उन्हें सरकारी गवाह बना लिया जाए। पुलिस ने सोमवार सुबह उनकी इस कोशिश का विरोध करते हुए पांच आरोपियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में पेश किया। कल एमएम के कोर्ट ने पवन और विनय की सरकारी गवाह बनने की ऐप्लिकेशन पर आदेश दिए थे कि वे अपनी ऐप्लिकेशन ट्रायल कोर्ट के सामने लगाएं।
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