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| राजकेश्वर पुरयाग |
अपने पूर्वजों के गांव में कदम रखते ही मॉरीशस के राष्ट्रपति राजकेश्वर पुरयाग रविवार को भावुक हो उठे। डेढ़ सौ साल से भी ज्यादा समय पहले उनके पड़दादा इस गांव से विदेश चले गए थे। पटना से 20 किलोमीटर दूर वाजिदपुर गांव में अपने सम्मान में आयोजित समारोह में रूंधे गले से पुरयाग ने कहा, "मैं गांव में, अपने पड़दादा की जमीन पर उनके मॅरीशस चले जाने के करीब 150 साल बाद कदम रख रहा हूं।"
अनुबंधित मजदूर के रूप में काम करने के लिए तत्कालीन ब्रिटिश उपनिवेश मारीशस जाने से पहले पुरयाग के पड़दादा प्रयाग वाजिदपुर में रहते थे। यह गांव अब पटना जिले के पुनपुन प्रखंड में है। पुरयाग की एक झलक पाने के लिए आसपास तक के गांव से भी हजारों की संख्या में लोग जमा थे। पत्नी अनीता पुरयाग और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ मॉरीशस के राष्ट्रपति अपने पूर्वजों के गांव पहुंचे।
टूटी-फूटी हिंदी में पुरयाग ने ग्रामीणों को संबोधित किया। ग्रामीणों की भीड़ ने उन्हें राष्ट्रपति बेटा कह कर संबोधित किया। पुरयाग ने कहा, "मैं आपको और इस भूमि का नमन करता हूं। मैं गांव में आ कर भावुक और बेहद खुश हूं।" भारत और मॉरीशस के संबंध पर पुरयाग ने कहा कि दोनों देशों के बीच भाई-भाई के जैसा संबंध है न कि दो देशों के जैसा।
ग्रामीणों ने पुरयाग का परंपरागत तरीके से स्वागत किया। उनके दूर के रिश्तेदारों गणेश और महेश महतो ने उनसे मुलाकात की। दोनों को मंच पर बुलाया गया और पुरयाग ने उनसे बातचीत की और उनका हालचाल पूछा। महतो ने पुरयाग को गांव की मिट्टी और धान की बालियां उपहार में दी। कुछ गांव वालों ने उन्हें चांदी का स्मृति चिन्ह भेंट किया।
इससे पहले पुरयाग और उनकी पत्नी विमान से पटना हवाई अड्डे पर पहुंचे जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनका स्वागत किया। एक घंटा राजभवन में रुकने के बाद वे गांव के लिए रवाना हुए।

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