झारखंड सरकार की प्रमुख सहयोगी छह विधायकों वाली आल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन राज्य में स्पष्ट जनादेश के लिए जनता के पास जाने के पक्ष में है. झारखंड की अर्जुन मुंडा सरकार की प्रमुख सहयोगी आजसू के अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो ने सरकार गिरने के बारे में पूछे जाने पर स्वीकार किया कि राज्य के गठबंधन दलों में उचित समन्वय का अभाव था जिससे छोटी-छोटी बातें बढ़कर पहाड़ बन गयीं वरना आज यह दिन देखने को नहीं मिलता.
सुदेश महतो ने कहा कि राज्य सरकार यहां स्थिरता के लिए बनायी गयी थी और वह विकास कार्य कर रही थी. झारखंड को अस्थिरता की कतई जरूरत नहीं है. लेकिन अब यहां की जनता को भी सोचना चाहिए कि वह आखिर इस तरह का विखंडित जनादेश क्यों देती है. उन्होंने कहा कि अब वह राज्य में नये जनादेश के लिए चुनाव के ही पक्ष में हैं लिहाजा किसी नयी सरकार के गठन में भाग नहीं लेंगे.
महतो कहा कि राज्य विधानसभा ने सदन की सीटें 81 से बढ़ाकर 150 किये जाने का प्रस्ताव पारित किया है,जिस पर केन्द्र सरकार और चुनाव आयोग को विचार करना चाहिए क्योंकि विधानसभा सीटें बढ़ने से संभव है कि इस तरह की त्रिशंकु विधानसभा नहीं बने. उन्होंने कहा कि राज्य में अस्थिर सरकारों के लिए सिर्फ राजनीतिक दल ही नहीं बल्कि जनता भी जिम्मेदार है. आखिर चुनावों के बाद राज्य की जनता के जनादेश का सम्मान कर पार्टियों को सरकार का गठन करना पड़ता है. इसमें जनता की जिम्मेदारी नहीं बनती है क्या? मंगलवार झामुमो ने मुंडा सरकार से समर्थन वापस लेने के फैसले में आजसू शामिल नहीं हुआ था और उसने उसके नयी सरकार गठित करने के प्रयास में भी सहभागी होने से इनकार कर दिया था.
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