आशातीत विकास के लिए...... - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 10 जनवरी 2013

आशातीत विकास के लिए......


लोक सहभागिता जरूरी !!!



विकास और लोक के बीच  ऎसा रिश्ता है जो एक-दूसरे के बगैर चल नहीं सकता। दोनों के बीच जितना प्रगाढ़ संबंध होगा उतना ही लोक और लोक के साथ क्षेत्र का विकास संभव है। विकास से जुड़ी प्रत्येेक गतिविधि को आशातीत सफलता देने के लिए यह जरूरी है कि इसमें ज्यादा से ज्यादा उन लोगों की भागीदारी हो जिन लोगों को इनका लाभ मिलना है। ऎसा होने पर विकास की योजनाओं और कार्यक्रमों में सम्पूर्ण सफलता का इतिहास कायम हो सकता है। जो लोग विकास पाने के इच्छुक हैं उनमें जागरुकता जरूरी है वहीं इन कामों के सूत्रपात से जुड़े लोगों को चाहिए कि वे आम जनता की भलाई के मकसद से काम करें और इसके लिए जन कल्याण की योजनाओं के बारे में जन-जन को परिचित कराएं।

इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि गांवों के लोग हों या शहरों के नागरिक, वे उन सभी समस्याओं से मुक्त हों जो विकास की राह में आड़े आती दिखाई देती हैं। इसके लिए हर व्यक्ति को चाहिए कि हर प्रकार की समस्याओं को गंभीरता लें और उनका समय पर निस्तारण कर लोगों को त्वरित राहत पहुंचाएं। हमारे काम-काज में भी वो ऊँचाइयां आनी चाहिएं जो हमारे लिए अपेक्षित हैं। विकास से जुडे़ तमाम कायोर्ं को गुणवत्ता के आधार पर पूरा करने के लिए सभी लोगों की जिम्मेदारी है कि वे अपने सामाजिक सरोकारोें और राष्ट्रीय चरित्र की भावना के साथ आगे आएं।

आम जन से जुड़े सभी प्रकार के कार्यों को बेहतर ढंग से पूर्णता देने में स्थानीयों, क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों और जागरुक लोगों की समर्पित भागीदारी होने पर सफलता की डगर जल्दी पूरी होने लगती है और आम आदमी को विकास के सुनहरे स्वप्नों के साकार होने का दिली अहसास भी होने लगता है। आंचलिक विकास और लोकोत्थान के लिए ग्रामीण विकास की बुनियाद को मजबूत बनाने और सभी स्तरों पर समन्वय जरूरी है। इसके लिए उन सभी लोगों को आपसी सामंजस्य और लोक सेवा की समर्पित भावनाओं के साथ आगे आना होगा जिनके जिम्मे समाज और देश की तस्वीर बदलने और आम आदमी की तकदीर गढ़ने की अहम् भूमिका है। सभी तरह सामूहिक प्रयासों को संबल दिया जाए तो कोई कारण नहीं कि हमारे स्वप्नों के अनुरूप विकास न हो।

आज लोकतांत्रिक परिपाटियों की मजबूती के चलते इतना फर्क जरूर आया है कि लोगों में विकास की भूख बढ़ी है। विकास की इस चाह को हर तरफ पूरा-पूरा सम्मान मिलना ही चाहिए। हमारे पास न योजनाओं की कमी है, न कार्यक्रमों की। केन्द्र और राज्य सरकार की असंख्योें योजनाएं आज हमारे सामने हैं और इन योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रियाएं भी अब इतनी सरल और सहज हो गई हैं कि आम आदमी के लिए थोड़ी सी जागरुकता से ही सारे काम बन सकते हैं। आम आदमी के भले तथा जरूरतमन्दों को संबल दिए जाने की जिम्मेदारी को ठीक ढंग से पूरा करने के लिए हमें पूरे समर्पण और लोक सेवा के जज्बे के साथ जुड़ना होगा। 




---कल्पना डिण्डोर---
(लेखिका राजस्थान के सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग में अधिकारी हैं।)

1 टिप्पणी:

Asha Joglekar ने कहा…

Vikas ke liye logon ka sahbhag bahut jaroori. Iseese unaki samasyaon ka nidan aur nirakaran ho payega.