कला को राजनीति का बंधक नहीं बनाना चाहिए. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 16 जनवरी 2013

कला को राजनीति का बंधक नहीं बनाना चाहिए.


भारत-पाकिस्तान सीमा विवाद से दोनों देशों के सांस्कृतिक और खेल संबंध प्रभावित हुए हैं। बॉलीवुड के लिए भी यह चिंता का विषय बन गया है। बीते दिनों हालिया तनाव की वजह से पुणे में पाकिस्तानी गायक और अभिनेता अली जाफर का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा, जबकि शास्त्रीय गायक जावेद बशीर से दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम रद्द करने को कहा गया। 

बहरहाल गीतकार और पटकथा लेखक प्रसून जोशी का कहना है कि कला को राजनीति का बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए क्योंकि कलाकार सीमा पार संबंधों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जोशी ने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि संगीत को राजनीति में घसीटा जाना चाहिए। मेरा मानना है कि दोनों देशों के संगीतकार इससे परे हैं और हमने हमेशा एक-दूसरे के संगीत का आनंद लिया है, इसे बने रहना चाहिए। यदि संगीतकार लोगों को जोड़ने में मदद करते हैं तो ऐसा होने देना चाहिए।'' 

जोशी ने पहली बार राजकुमार संतोषी की फिल्म 'लज्जा' के लिए गीत लिखे थे। उसके बाद 'हम तुम' 'फना' 'रंग दे बसंती' 'तारे जमीं पर' 'ब्लैक' और 'दिल्ली 6' जैसी कई हिट फिल्मों के गीत लिखे। वह कहते हैं, ''यदि आप कलाकारों से बात करें तो पाएंगे कि उनमें नफरत जैसी कोई चीज है ही नहीं। वे प्रेमी हैं, वे रुमानी हैं, वे प्रकृति और मानवता से प्रेम करते हैं, और अगर वे ऐसा नहीं करते तो कलाकार नहीं हैं।''

जोशी के नजरिये से गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर भी इत्तेफाक रखते हैं जो भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ताना और व्यापार संबंधों की पुरजोर वकालत करते हैं। जावेद अख्तर के  मुताबिक भारत, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका के लिए एक वृहत बाजार होना चाहिए। सभी देशों के बीच व्यापार, खेल और छात्रों का आदान-प्रदान होना चाहिए।

जावेद ने हाल ही में पाकिस्तान द्वारा दो भारतीय सैनिकों की हत्या और उनके शवों को क्षत-विक्षत करने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जो भी हुआ है निंदनीय है और लोगों का गुस्सा करना जायज है। पूरे घटनाक्रम का असर दोनों देशों के खेल संबंधों पर भी पड़ा है। इसके कारण भारतीय हॉकी लीग में हिस्सा लेने आए पाकिस्तानी खिलाड़ियों की टीम को वापस भेजा जा रहा है।

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