प्रदेश में फास्ट ट्रैक कोर्ट की फिलहाल कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि राज्य में मात्र 540 महिला उत्पीड़न के मामले हैं, जिन पर नैनीताल उच्च न्यायालय हर शुक्रवार को सुनवाई करने जा रहा है। वहीं जिलों की अदालत भी महिला उत्पीड़न के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के लिए प्रयासरत है। वहीं उन्होंने कहा कि गैरसैंण में विधानभवन बनने में अभी तीन वर्ष लग सकते हैं, लिहाजा विधानभवन बनने के बाद तय होगा कि यहां ग्रीष्मकालीन राजधानी हो या इसका स्वरूप क्या होगा यह उस वक्त ही तय किया जाएगा।
यह बातें रविवार को यहां मुख्यमंत्री आवास पर प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कही। उन्होंने कहा कि देशभर में महिला उत्पीड़न मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की जा रही है, लेकिन उत्तराखण्ड राज्य में मात्र 540 महिला उत्पीड़न के मामले उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं, जिन पर उच्च न्यायालय द्वारा प्रत्येक शुक्रवार को सुनवाई किया जाना सुनिश्चित किया गया है, ताकि महिला उत्पीड़न के मामलों को निस्तारित किया जा सके। वहीं उन्होंने कहा कि राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की जरूरत वे महसूस नहीं करते हैं, क्योंकि यहां महिला उत्पीड़न के मामले अन्य राज्यों के मुकाबलें बहुत कम हैं। उन्होंने कहा कि उनकी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से इस मामले को लेकर काफी लंबी वार्ता हो चुकी है, जिस पर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा उन्हें अवगत कराया गया कि महिला उत्पीड़न मामले में जिलों में तेजी से ऐसे मामलों को निस्तारित करने और महिलाओं को न्याय की दिशा में तेजी से काम किए जाने के निर्देश राज्य के जिला न्यायालयों और अन्य सक्षम न्यायालयों को दे दिए गए हैं।
उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के उस बयान पर जवाब देने से साफ मना कर दिया जिसमें श्री कुंजवाल ने कहा था कि राज्य की राजधानी गैरसैंण में स्थापित हो और राज्य के अधिकारी कम से कम तीन महीने गैरसैंण से राजधानी का कार्य कर जनता को यह एहसास कराए कि पहाड़ी राज्य की राजधानी पहाड़ में और अधिकारी उनकी समस्याओं के निदान के लिए पहाड़ी राजधानी में हैं। वहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि वे रविवार प्रातः श्री कुंजवाल को मिलने उनके आवास गए थे और उनसे उनकी सारी बात हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वे विधानसभा अध्यक्ष के साथ हैं और विधानसभा अध्यक्ष और वे सरकार को चलाने वाली धुरी हैं। लिहाजा इस तरह के बयानों को ज्यादा हवा नहीं दी जानी चाहिए।
(राजेन्द्र जोशी)
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